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गोरंग घाटी के 12 गांवों में किए शोध और सर्वे कार्य

Sun, 20 Dec 2015 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
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गोविंद बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा का पवित्र कैलास भू-क्षेत्र में दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक दिनी अनुश्रवण कार्यशाला संपन्न हो गई है।
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मुख्य विकास अधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा कि संस्थान की ओर से चंडाक-आंवलाघाट जलागम क्षेत्र के गोरंग घाटी के 5 ग्राम पंचायतों के 12 गांवों में दो वर्षों के भीतर शोध और सर्वे कार्य किया गया है।
कहा कि गोरंग घाटी क्षेत्र में कई विभागों के माध्यम से विकास कार्यों को संपन्न करने और दीर्घकालीन योजनाओं को तैयार करने में अधिक सुविधा मिलेगी, जिसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
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पवित्र कैलास भू-क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के नोडल अधिकारी डा. आरएस रावल ने कहा वर्ष 2012 से प्रारंभ हुई परियोजना में शोध और सर्वे करने के बाद दीर्घकालीन योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के सहयोग के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है।
हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिकों ने गोरंग घाटी क्षेत्र में शोध कार्यों के आधार पर संभावित विकास कार्य, भौगोलिक परिस्थिति, ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकता, वन, कृषि औद्योगिक, सिंचाई, भूमि, जल संरक्षण आदि के बारे में जानकारी दी। क्षेत्र के सतत पर्यावरणीय संरक्षण और विकास के लिए जन सहभागिता के साथ विकसित लघु कार्ययोजना को प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में कोसी कटारमल अल्मोड़ा के वैज्ञानिक डा. राजेश जोशी, डा. आरसी प्रसाद, डा. आरके सिंह, डा. रवींद्र जोशी, डा. जीपी पांडे, ज्योति जोशी, हर्षिता बिष्ट, डीआरडीए के नरेश कुमार, डीडीओ गोपाल गिरी, नाबार्ड के डीजीएम पुनीत नागर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे।
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