ठुलीगाड़ पंपिंग योजना में कम होता जा रहा पानी
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ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना में हर साल की तरह इस बार भी गर्मी नजदीक आते ही पानी की कमी होने लगी है। यह बात अलग है कि इस समय जल संस्थान जैसे-तैसे इस योजना से 2.5 से 3 एमएलडी तक पानी प्राप्त कर रहा है, लेकिन मई में इतना पानी मिल पाना संभव नहीं होगा। ठुलीगाड़ योजना के ठीक ऊपर सेना ने अपनी आवासीय कालोनी के लिए भी अलग से योजना बनाई है। इस कारण एक ही नाले से दो योजनाएं बनने से ठुलीगाड़ योजना पर संकट आने लगा है।
ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था। नगर के पेयजल संकट से निपटने के लिए इस नई योजना को तैयार किया गया। ठुलीगाड़ एक बरसाती नाला है। इसमें बारिश के सीजन में तो पर्याप्त रहता है, लेकिन सर्दियों से पानी की कमी होने लग जाती है। गर्मियों में ठुलीगाड़ का जलस्तर लगातार कम होने लगता है। इस बार बीच-बीच में हो रही बारिश से स्थिति अभी नहीं बिगड़ी है, लेकिन जल संस्थान को आशंका है कि यदि आगे बारिश की रफ्तार कम हुई तो मई में संकट गहरा सकता है। इस समय जल संस्थान सेना के अधिकारियों से बात कर रोजाना दो पंपों को चलाने लायक पानी की व्यवस्था कर रहा है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि ठुलीगाड़ का पानी नगर की करीब 40 फीसदी आबादी को बांटा जाता है। इस पानी को पहले मिशन कॉलेज के पास बनी टंकी में स्टोर किया जाता है। वहां से इसे रई, जाखनी, भाटकोट इलाके में बांटा जाता है। मई में यदि पानी कम हुआ तो इन इलाकों में पेयजल संकट गहरा जाएगा।
आंवलाघाट योजना कब पूरी होगी, तय नहीं
पिछली सरकार के समय शुरू हुई आंवलाघाट पंपिंग पेयजल योजना का काम कब पूरा होगा, अभी तय नहीं है। योजना में अभी 30 फीसदी काम बचा है। पानी की पंपिंग के लिए आंवलाघाट में बिजली का सब स्टेशन स्थापित किया जाना शेष है। इसके अलावा नगर के अंदर भी वितरण लाइन तैयार की जानी है। अब यह काम नई सरकार के पाले में चला गया है।