मदकोट से मुनस्यारी को पैदल जाती 92 वर्षीय गोविंदी देवी
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पहाड़ के लोग भी अब सुविधाभोगी होते जा रहे हैं। एक-दो किलोमीटर पैदल चलने की जरूरत पड़ी तो लोग परेशान हो जाते हैं, लेकिन मदकोट से पांच किलोमीटर दूर इमला गांव निवासी 92 वर्षीय गोविंदी देवी आज भी 27 किलोमीटर तक पैदल चल लेती हैं। वह अब तक कभी किसी गाड़ी में नहीं बैठीं। वह पैदल चलने में ज्यादा स्वस्थ महसूस करती हैं। इसलिए वह अक्सर 27 किलोमीटर दूर अपने मायके तोमिक और मुनस्यारी जाती रहती हैं।
गोविंदी देवी ने बताया कि उस समय पहाड़ों पर बाल विवाह का प्रचलन था और दस वर्ष की उम्र में उनका विवाह इमला निवासी पान सिंह से हो गया। गोविंदी बताती हैं कि पहले पहाड़ पर सड़कें नहीं थी। लोग अल्मोड़ा, हल्द्वानी तक पैदल जाते थे। पैदल चलने से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहता था। गोविंदी देवी का मकान मुनस्यारी में भी है। वहीं पर उनकी बेटी देवकी देवी भी रहती हैं। महीने में एक-दो बार गोविंदी मुनस्यारी जाती हैं। इसके लिए पहले वह पांच किलोमीटर चलकर मदकोट पहुंचती हैं।
मदकोट से सड़क के रास्ते 22 किलोमीटर का सफर भी पैदल ही करती हैं। उम्र अधिक होने के कारण हालांकि वह ज्यादा तेज नहीं चल पाती, लेकिन उनको पैदल चलने में ही आनंद आता है। वह कहती हैं कि वाहन से सफर करना लोगों की जरूरत और मजबूरी दोनों हो सकती है, लेकिन यह ध्यान देना चाहिए कि पैदल चलने का क्रम टूटना नहीं चाहिए। जो व्यक्ति जितना पैदल चलेगा, वह उतना ही स्वस्थ और दीर्घजीवी भी रहेगा।
गोविंदी को किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है। वह पैदल चलने में युवाओं को भी मात दे रही हैं। उन्होंने कहा कि पैदल चलने से मोटापा नहीं बढ़ता। पेट संबंधी कोई बीमारी नहीं होती। भूख ज्यादा लगती है। पैदल चलने वाले को सामान्य तरह की बीमारी कभी नहीं घेरती। पैदल चलने को वह स्वस्थ रहने का पहला सूत्र मानती हैं।