चैत्र नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि एक होने से मंदिरों में लोगों का काफी जमावड़ा रहा। मंदिरों के साथ ही घरों में भी कन्या पूजन के कार्यक्रम हुए।
जिला मुख्यालय के उल्का देवी मंदिर, कामाक्षा देवी मंदिर, कौशल्या देवी मंदिर, गुरना देवी, कनालीछीना के जयंती मंदिर, गंगोलीहाट के हाट कालिका मंदिर, चामुंडा, शीतला, अंबिका, वैष्णवी, क्षमा, बेड़ीनाग के त्रिपुरासुंदरी, कोटगाड़ी मंदिर में दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। महाष्टमी के अवसर हाट कालिका के दरबार में मेला लगा। शयन आरती के बाद मंदिरों के कपाट बंद हुए।
नाचनी। नवरात्र अष्टमी पर होकरा माता के दरबार में लगने वाले मेले में दूर-दूर से लोग पहुंचे। दर्जनों पंडितों ने दुर्गा शप्तशती का पाठ किया। मुख्य पुजारी भगवती प्रसाद द्विवेदी ने पूजा संपन्न कराई।
डीडीहाट। आंकोट भगवती मंदिर में भारी संख्या में लोगों ने देवी के दर्शन किए। आंकोट के भगवती मंदिर के कपाट मंदिर के इतिहास में इस नवरात्र में पहली बार खुले हैं। इससे पहले मंदिर के कपाट केवल पूर्णिमा को खुलते थे। अब हर साल नवरात्र पर भी मंदिर के कपाट खुलेंगे। नवमी तिथि पर डीडीहाट के लोनिवि परिसर में सुंदरकांड का पाठ किया गया। मंदिरों के साथ ही घरों में कन्यापूजन हुआ।
अस्कोट। खोलियागांव के हुस्केर देव मंदिर में सामूहिक कन्या पूजन का आयोजन किया गया। कन्याओं और बटुक भैरवों की पूजा की गई। पंडित मोहन चंद्र ओझा ने मुख्य यजमान कुंवर बहादुर पाल, उनकी पत्नी विमला पाल के हाथों धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। हुस्केरदेव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह पाल आदि मौजूद थे। मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर में पंडित नारायण दत्त पंत ने पूजा, अर्चना संपन्न कराई।