पिथौरागढ़। जिले में ठंड बढ़ने के साथ ही बेल्स पाल्सी यानी चेहरे के पक्षाघात या लकवा की जकड़ में लोग आने लगे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले एक सप्ताह में इस रोग से जूझते हुए 37 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड की अधिकता से चेहरे की मांसपेसियों में सिकुड़न इसकी प्रमुख वजह है। ठंड की अधिकता से चेहरे की तंत्रिकाएं प्रभावित हो रही हैं।
जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से बेल्स पाल्सी के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। रोजाना पांच से सात मरीज इस रोग से जूझते हुए इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक इस रोग की जकड़ में बुजुर्गों के साथ ही युवा और बच्चे भी आ रहे हैं जो चिंताजनक है। यह रोग चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाओं के संकुचित होने या वायरल संक्रमण से होता है।
चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक ठंड इसका प्रमुख कारण है। चेहरा सीधे ठंडी हवाओं के संपर्क में आता है जो बेल्स पाल्सी का कारण बन रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि आम तौर पर बुजुर्ग इस बीमारी से ग्रसित होते हैं। अब 10 से 25 वर्ष के बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ठंड से बचाव से ही इस रोग से दूर रहा जा सकता है। चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए व्यायाम जरूरी है।
बेल्स पाल्सी के लक्षण
पलक का झुकाना या आंख बंद करने में कठिनाई।
मुंह का एक तरफ लटकना और खाने-पीने में दिक्कत।
एक तरफ से लार टपकना, प्रभावित क्षेत्र के आसपास दर्द और सिरदर्द होना।
स्वाद का सही पता न चलना और आंसू या लार की मात्रा में कमी या अधिकता।
बचाव
ठंड से चेहरे को बचाना जरूरी है।
अधिकांश लोग कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर ठीक हो जाते हैं।
सुधार के शुरुआती लक्षण 14 दिनों के भीतर शुरू हो जाते हैं।
कुछ लोगों में थोड़ी कमजोरी या लकवा के लक्षण रह सकते हैं।
कोट
दवा और व्यायाम के साथ बेल्स पाल्सी को ठीक होने में लगभग नौ महीने का समय लग जाता है। नियमित व्यायाम और खान-पान में सुधार की आवश्यकता है। लोगों को बदलते मौसम में अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। - डॉ. रवि जोशी, फिजियाेथेरेपिस्ट, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
कोट
ठंड की अधिकता से बेल्स पाल्सी के मरीज बढ़े हैं। लोगों को ठंड से बचना होगा। सुबह-शाम घर से बाहर निकलने से पहले चेहरे को ढकना जरूरी है। - डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़