डीडीहाट (संजू पंत)। लगता है सरकार बनने के बाद नेताओं की याददाश्त कमजोर हो जाती है तभी तो चुनाव से पहले जनता से किया हुआ वादा वह भूल जाते हैं। अब डीडीहाट को ही ले लें तो 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद से डीडीहाट को अलग जिला बनाने की मांग उठती आ रही है। छह दशक पुरानी सीमांत जिले की इस मांग को यूपी के जमाने से लेकर उत्तराखंड का दौर आने तक किसी भी दल ने पूरा नहीं किया। हालांकि इस जिले के नाम पर हर राजनीतिक दल ने सियासी रोटियां जरूर सेकीं हैं। चुनाव में जो दल विपक्ष में आता है, वह सबसे पहले डीडीहाट में जिले के नाम का अपना सांगठनिक ढांचा बना देता है और सरकार में आने वाला दल जिले के गठन से अपनी दूरी बना लेता है।
उत्तराखंड गठन के बाद सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने डीडीहाट को अपना सांगठनिक जिला बनाकर अपने जिलाध्यक्ष सहित अपने जिले के सांगठनिक सभी पदों पर नियुक्ति दी। वर्ष 2000 से 2002 तक और उसके बाद 2007 से 2012 तक उत्तराखंड में भाजपा की सरकार रही और इन सालों में भाजपा का संगठनात्मक जिला डीडीहाट बना रहा लेकिन इसे प्रशासनिक रूप से जिला नहीं बनाया गया। वर्ष 2012 से 2017 तक कांग्रेस की सरकार उत्तराखंड में रही लेकिन चुनाव के समय जिला बनाने का नारे देने वाली कांग्रेस भी सत्ता में बैठते ही डीडीहाट को जिले का स्वरूप देना भूल गई। 2017 से 2022 के शासनकाल के दौरान भाजपा ने तीन मुख्यमंत्री दिए लेकिन इन तीनों मुख्यमंत्रियों को जिला बनाने की याद नहीं आई। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला बनाने से साफ इनकार ही कर दिया था। उत्तराखंड के पहले 10 सालों में उत्तराखंड क्रांति दल के बिना सरकार का संचालन लगभग असंभव था लेकिन यूकेडी ने भी डीडीहाट जिले के गठन को लेकर कभी गंभीरता नहीं दिखाई। वर्ष 2022 के चुनाव में जहां भाजपा के एजेंडे से डीडीहाट जिला नदारद हो गया है। वहीं कांग्रेस, उक्रांद, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अब भी डीडीहाट जिले के गठन के लिए लोगों से वोट मांग रहे हैं।
डीडीहाट जिला डीडीहाट के मूल विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। बिना जिला गठन के डीडीहाट का विकास असंभव है। जिले के लिए अब सभी राजनीतिक दलों ने वोट की राजनीति नहीं करनी चाहिए। - दीपक कन्याल।
जिले का गठन न होने से डीडीहाट के दर्जनों गांव पूरी तरह से खाली होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बाजार से लगातार ग्राहक कम होते जा रहे हैं। बिना जिले के गठन के लोग अब पलायन करने का मन बना रहे हैं। -प्रकाश बोरा।