नाचनी (पिथौरागढ़)। रामगंगा नदी में लगातार मलबा आने से बनी कृत्रिम झील का दायरा एक किलोमीटर से अधिक बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से झील के आसपास बसे गांवों और नदी किनारे के इलाकों पर खतरा गहरा गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण लोगों में दहशत का माहौल है।
हरड़िया नाले से लगातार रामगंगा में मलबा आ रहा है, जबकि गटगांव की पहाड़ी पर करीब 300 मीटर क्षेत्र में कई स्थानों पर भूस्खलन हो रहा है। वहां से गिर रहा मलबा भी नदी में समा रहा है। इससे भैंसखाल, रसियाबगड़, लोधियाबगड़, टिमटिया और नाचनी बाजार सहित निचले क्षेत्रों के लोग चिंतित हैं।
रामगंगा का प्रवाह बाधित होने से बनी झील का असर नदी पार बागेश्वर जिले के कालापैर, काभड़ीगांव और केंचूआं गांव तक पहुंच गया है। इन क्षेत्रों में भी भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। लगातार जमा हो रहे मलबे के कारण झील का विस्तार पिथौरागढ़ और बागेश्वर दोनों जिलों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।
15 जुलाई से सिंचाई विभाग ने पोकलैंड मशीन की मदद से रामगंगा में बने अवरोध को हटाने का अभियान शुरू किया था। बारिश थमने के दौरान तीन दिन तक चले अभियान में नदी के मुहाने से काफी मात्रा में मलबा हटाया गया, लेकिन पिछले दो दिनों की लगातार बारिश के बाद फिर से भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। इससे कृत्रिम झील का जलस्तर दोबारा खतरनाक स्तर तक पहुंचने लगा है।
सिंचाई विभाग का कहना है कि बारिश के दौरान मलबा हटाने का कार्य संभव नहीं है। बारिश रुकने के बाद भी दलदली जमीन के कारण पोकलैंड मशीनों को मौके तक पहुंचाने में समय लग सकता है।
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बारिश थमने के बाद ही रामगंगा से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया जा सकता है। बीते दिनों बारिश थमने पर नदी के मुहाने से काफी हद तक मलबा हटाया गया था। लगातार बारिश हुई तो कार्य बाधित होगा।
एसएस बिष्ट, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग।
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