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पहाड़ पर तो आम आदमी पर दोतरफा मार

Sun, 03 Dec 2017 10:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़।
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सब्जी की दुकान में सब्जी बेंचता दुकानदार। - फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों पर सुविधाएं देने की ताल सरकार का हर नुमाइंदा ठोकता है पर इस दिशा में धरातल पर कभी काम हुआ ही नहीं है। इन दिनों पहाड़ के लोगों पर दोतरफा मार पड़ रही है। पहली, बंदर और सुअर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और दूसरी पहाड़ पर आने वाली सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में आम आदमी सिर्फ परेशान होकर रह गया है। सरकारी नुमाइंदे सुविधाओं का लालच देकर ग्रामीणों को गांव में ही बसे रहने की सलाह देते हैं पर हकीकत गांव के लोग ही जानते हैं। सरकार इतना तक नहीं कर सकी है कि पहाड़ के लोगों को जंगली जानवरों से निजात दिला सके। रही-सही कसर इन दिनों पहाड़ पर आने वाली सब्जियों के दामों ने पूरी कर दी है। 

बंदर, सुअरों से परेशान किसानों ने छोड़ी आलू की खेती 
अस्कोट (पिथौरागढ़)। क्षेत्र के कई गांवों में बंदरों और सुअरों के आतंक से परेशान लोगों ने आलू की खेती करनी ही छोड़ दी है। बंदर आलू के साथ ही नींबू, माल्टा, संतरे को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सुअर आलू की खेती को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। खोलियागांव, धौलाकोट, देवल के साथ ही कई गांवों में बंदर, सुअरों का आतंक है। 
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किसानों का कहना है कि बंदर घरों तक से सामान उठा ले जा रहे हैं। भगाने पर काट खाने को दौड़ते हैं। रात को सुअर खेती उजाड़ रहे हैं। जंगली जानवरों के आतंक के कारण लोग खेती से विमुख हो रहे हैं और गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने की चाहे कितनी ही बातें कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। वन विभाग किसानों को हो रही दिक्कत से वाकिफ होने के बाद भी कोई कदम नहीं उठा रहा है। खोलिया गांव के ग्राम प्रधान किशन राम कहते हैं कि इन हालत में किसानों का जीवन स्तर उठाने और पलायन रोकने की बात बेमानी है। ग्राम प्रधान ने कहा कि जंगली जानवरों का आतंक अब और बर्दाश्त नहीं किया जाता। सरकार इस दिशा में धरातल पर ठोस कदम नहीं उठाती है तो क्षेत्र के लोगों को साथ लेकर आंदोलन छेड़ा जाएगा। 

सब्जियां महंगी हुईं तो खानी ही छोड़ दीं 

चंपावत। पांच हजार रुपये महीने आमदनी वाली गृहणी चंपा देवी के परिवार ने 20 नवंबर के बाद से एक भी दिन टमाटर का स्वाद नहीं चखा है। प्याज और दूसरी सब्जियों का भी कम उपयोग कर दिया है। इसके बजाए वह अरहर, चना और अन्य दालों का भोजन में इस्तेमाल कर रही हैं। इसकी वजह पिछले दो सप्ताह से सब्जी के दामों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी है। 
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चंपावत में ज्यादातर सब्जियां हल्द्वानी से आती है। यहां बढे़ दामों ने सब्जियों को आम लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है। प्रमुख सब्जी कारोबारी भगवत कलखुड़िया और पंकज कलखुड़िया का कहना है कि टमाटर, प्याज, मटर सहित अधिकांश सब्जियों के दाम में वृद्धि हुई है। दाम बढ़ने का असर सब्जी की बिक्री पर भी असर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि बेतहाशा बढ़ रहे दामों पर नियंत्रण का उपाय होना चाहिए। सब्जी कारोबारी भी बढ़ोतरी की वजह नहीं जानते। अलबत्ता उनका कहना है कि अधिक दाम की वजह से सब्जियों की बिक्री में 35 प्रतिशत तक गिरावट आई है। 


चंपावत में सब्जियों की कीमतें (रुपये प्रति किलोग्राम)
सब्जी      इस वर्ष             पिछले वर्ष
टमाटर        80                   30
प्याज         60                    20
मटर          80                    20
आलू         20                    15
फूल गोभी    40                     20
पत्ता गोभी     40                    20
शिमला मिर्च   60                     40
लौकी         40                     20
बैंगन           30                   20
बीन           80                     40
भिंडी          80                      40
गडेरी          30                      30
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