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इनरलाइन के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी 

Sun, 03 Dec 2017 10:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़।
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इनरलाइन के मुद्दे पर धारचूला में बैठक करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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 इनरलाइन को छियालेख से जौलजीबी में लाने की मांग को लेकर यहां के लोग फिर से संगठित होने लगे हैं। पांच दिसंबर को तहसील दिवस में यह मामला डीएम के सामने उठाया जाएगा। उसके बाद एक शिष्टमंडल दिल्ली जाकर केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करेगा। यदि इनरलाइन को जौलजीबी लाने का फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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वर्ष 1999 में सरकार ने इनरलाइन को जौलजीबी से 55 किलोमीटर दूर छियालेख में कर दिया था। उससे पहले तक जौलजीबी से धारचूला जाने वालों को इनरलाइन परमिट लेना पड़ता था। यह परमिट मात्र तीन दिनों के लिए जारी होता था। कोई भी व्यक्ति बिना परमिट के धारचूला में प्रवेश नहीं कर सकता था। रविवार को यहां हुई तमाम संगठनों की बैठक में कहा गया कि इनरलाइन का प्रतिबंध हटने के बाद धारचूला में बाहरी लोगों की आवाजाही और आपराधिक घटनाएं बढ़ने लगी हैं।

लोगों की मांग है कि धारचूला में प्रवेश के लिए पहले की तरह इनरलाइन के प्रतिबंध लागू होने चाहिए। सीमांत की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है। बैठक में कहा गया कि अब इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ी जाएगी और इनरलाइन को पहले की तरह जौलजीबी में स्थापित कराया जाएगा। बैठक में रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल, अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री कैलाश रावत, व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा, सीमांत अनवाल समुदाय के अध्यक्ष गुमान सिंह बिष्ट, हनुमान सिंह नबियाल, रवींद्र सिंह, देवकृष्ण फकलियाल, वीरेंद्र नबियाल, राजीव कोहली, पूरन ग्वाल, प्रकाश गुंज्याल, भीम सिंह रावत, राजेश कुटियाल, नंदा बिष्ट, नंदा फिरमाल, लक्ष्मी रायपा, प्रेमा कुटियाल, दशरथी कुटियाल, बिंदु रौंकली, दीपा रावत, प्रभात सिंह, रितेश गर्ब्याल, धर्मेंद्र गर्ब्याल सहित तमाम लोग उपस्थित थे। बैठक का संचालन रं कल्याण संस्था के सचिव राम सिंह ह्यांकी ने किया। 
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