पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय की सेना छावनी में स्थित सेरा देवल मंदिर का रास्ता रोके जाने से ग्रामीणों और सेना में विवाद हो गया। सेना ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्रामीणों को पूजा अर्चना के लिए नहीं जाने दिया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर घंटों जाम लगा दिया। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सेना के बीच वार्ता में अस्थायी समाधान निकाले जाने के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला और मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की।
सोमवार को नवरात्र पर ग्रामीण कासनी के प्राचीन मंदिर सेरा देवल में पूजा अर्चना के लिए जा रहे थे आरोप है कि तभी सेना के जवानों ने उन्हें रोक दिया। ग्रामीणों ने क्षेत्र के प्रधानों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद प्रधान सुरेश कसनियाल और मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर भट्ट के संयुक्त नेतृत्व में सेरादेवल जाने वाले मंदिर मार्ग में सेना के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। धरना प्रदर्शन के कारण सेना के वाहनों के साथ टैक्सी वाहनों की आवाजाही ठप रही। ग्रामीणों ने कहा कि सेना उन्हें पूजा अर्चना करने से रोक रही है। सालों से वह इस रास्ते से मंदिर जाते हैं। मौके पर पहुंचे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र बोरा ने प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
मौके पर पहुंचे तहसीलदार पंकज चंदोला ने सेना के अधिकारियों से वार्ता की। करीब एक बजे मामले का समाधान हुआ, जिसके बाद ग्रामीण पूजा-अर्चना के लिए गए। धरना देने वालों में प्रधान भड़कटिया योगेश जोशी, पूर्व प्रधान ममता कसनियाल, मनोज कसनियाल, कैलाश चंद्र, कमलेश कसनियाल, जगन्नाथ पांडे, भैरव गिरी, चंद्रा देवी, प्रकाश भट्ट, अशोक भट्ट, भावना, पुष्पा देवी, खीमा देवी, तुलसी देवी, नीलम, हरिप्रिया देवी, ललित सिंह, पूर्व प्रधान कुसौली रघुवीर सिंह, हीरा गिरी, अर्जुन गिरी समेत कई लोग शामिल रहे।
सेना, प्रशासन और ग्रामीणों की बीच होगी वार्ता
सेरा देवल मंदिर को जाने वाले रास्ते को लेकर सेना, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता कराई जाएगी। तहसीलदार पंकज चंदोला ने बताया कि जिलाधिकारी या उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में कुछ दिन बाद सेना और ग्रामीणों के बीच बैठक होगी। उसमें रास्ते को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान कर लिया जाएगा। जो भी दिक्कतें हैं उन्हें बैठक कर सुलझाया जाएगा।