मदकोट के पास बाता (उमडांडा) गांव में बुधवार को करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई। इस तहसील में छह माह के भीतर बिजली करंट से तीन लोगों की मौत हो गई है। तीन दिन पहले जिला मुख्यालय के पास कंतगांव में भी एक महिला की बिजली करंट से मौत हुई थी। राजस्व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिनेश सिंह (23) पुत्र हयात सिंह ज्येष्ठा बुधवार सुबह घर से कुछ दूरी पर काम के लिए गया था। जैसे ही वह बिजली के एक पोल के पास से गुजरा तो उसे करंट लग गया।
दिनेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वह जीप चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। राजस्व पुलिस के उपनिरीक्षक गणेश सिंह टोलिया ने मौके पर जाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा। विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी नीरज पांडे ने बताया कि मौका मुआयना करने के बाद ही सारी स्थिति पता चलेगी। उन्होंने कहा कि युवक को करंट कैसे लगा इसका पता लगाया जा रहा है।
बता दें कि तहसील क्षेत्र में छह माह के भीतर करंट से यह तीसरी मौत हो गई है। इससे पहले मदकोट क्षेत्र के सेरा गांव निवासी हयात सिंह की जंगल में बकरी चराते समय मौत हुई थी। उनकी एक बकरी बिजली के पोल से चिपक गई थी। उसे हटाने के चक्कर में वह खुद ही पोल से चिपक गए। करीब पांच माह पहले गिरगांव निवासी दुर्गा सिंह की भी अपने घर के पास ही पोल में आए करंट की चपेट में आकर मौत हो गई।
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी तहसील के दूरदराज इलाकों में बिजली की लाइन बिछाने में घोर लापरवाही की गई है। यह मामले कई बार क्षेत्र समिति की बैठकों में भी उठ चुके हैं। बिजली के झूलते तारों से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। खुले तारों के कारण पोलों में करंट दौड़ता रहता है, यदि अनजाने में किसी ने पोल छू दिया तो वह करंट की चपेट में आ जाता है। जानवर, पक्षी तो अक्सर करंट का शिकार होते रहते हैं।
विद्युत विभाग ने लाइन के आसपास गुजरने वाले पेड़ों की लापिंग नहीं की है। इस कारण पेड़ों में भी करंट आता रहता है। पिथौरागढ़ के कंतगांव में तीन दिन पहले महिला की मौत पेड़ की टहनी में करंट आने के कारण ही हुई थी।
करंट से मौतों के बाद जनता आंदोलन का रास्ता भी अपनाती है, लेकिन विभाग सुधार की कोई पहल नहीं करता। विद्युत विभाग के एसडीओ नीरज पांडे इन हादसों के लिए पूरी तरह विभाग को जिम्मेदार नहीं मानते। उनका कहना है कि लोगों की अपनी गलती से भी ऐसे हादसे हो जाते हैं।
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय समेत हर नगर और कस्बे में बिजली के तारों का जाल फैला है। विभाग कभी केबल लाइन डालने, कभी सपोर्ट लगाने के नाम पर खर्चा तो करता है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आता। विद्युत विभाग का जिला मुख्यालय में ही सिस्टम इतना खराब है कि थोड़ी सी हवा, बारिश में लाइन ध्वस्त हो जाती है।
ग्रामीण अंचलों में यह समस्या और भी विकराल है। तारों की मरम्मत, खराब पोलों को बदलने, झूलते तारों को कसने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता। आम लोगों का तो यही कहना है कि पेड़ों की लॉपिंग के लिए आने वाली धनराशि का कभी उपयोग नहीं होता, वरना लाइन में पेड़ गिरकर सप्लाई बाधित होने जैसी समस्या सामने ही नहीं आती।