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अंगद नाम बाली का बेटा, तो सों कबहुं हुई नहीं भेंटा

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थल की रामलीला में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध का दृश्य। - फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट/थल। हाट कालिका दरबार की रामलीला में अंगद-रावण संवाद का मंचन किया गया।
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भगवान राम के दूत के रूप में युवराज अंगद रावण के दरबार में पहुंचते हैं। रावण अंगद से परिचय पूछता है। अंगद कहते हैं अंगद नाम बाली का बेटा तो सों कबहुं हुई नहीं भेंटा। रावण और अंगद के बीच तीखा संवाद होता है। रावण की भूमिका भूपेंद्र रावल भुप्पा, अंगद की भूमिका पंकज उप्रेती ने निभाई। दोनों कलाकारों ने शानदार अभिनय के लिए खूब तालियां बटोरी। रामलीला में महाकाली न्यूज एजेंसी और युवाओं की ओर से त्रिभुवन बिष्ट के संचालन में रामायण पर आधारित क्विज प्रतियोगिता कराई गई।
उधर थल में रामलीला के दसवें दिन रानी मंदोदरी के रावण को समझाने से मंचन की शुरूआत हुई। मंदोदरी रावण को सीता को वापस लौटाने की अपील करते हुए कहती हैं ‘पति कर जो विनय यह तुमसे, सीता दे दीजे पति तुम...’ कि के लिए समझाती है। इसके बाद लक्ष्मण शक्ति लगने, संजीवनी बूटी सुंघाकर सचेत होने की लीला का शानदार मंचन प्रस्तुत किया गया। लीला की रोचकता में वायुमार्ग से हनुमान का आना विशेष आकर्षण रहा। भानु पाठक और सुनील गोस्वामी के प्रयास से यह दृश्य दिखाया गया।
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मुख्य अतिथि विधायक विशन सिंह चुफाल, विशिष्ट अतिथि सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष नरेंद्र रौतेला, कमल कन्याल, ऋतुराज सेमटी ने दीप जलाकर लीला शुरू कराई। इस मौके पर रामलीला समिति के उपाध्यक्ष कृष्ण गोपाल पंत, व्यवस्थापक दिनेश पाठक, प्रवीण जंगपांगी, अर्जुन सिंह रावत, मनोज गोस्वामी समेत सैकड़ों दर्शक मौजूद रहे।
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