पिथौरागढ़। कनारी पाभैं निवासी रतन सिंह को क्या पता था कि एक दिन उनके शहर का असंवदेनशील सिस्टम उनकी जान ले लेगा। रतन किडनी की समस्या से जूझ रहे थे और डायलिसिस कराने के लिए अस्पताल जाने को घर से निकले थे। खराब सड़क की वजह से एंबुलेंस चालक ने उन्हें बीच में क्या उतारा, उनकी तो जीवन का सफर ही खत्म हो गया। किसी तरह कंधों पर लदकर चंद सांसाें के साथ अस्पताल तो पहुंच गए लेकिन... रतन अब इस दुनिया में नहीं हैं।
उत्तराखंड के दुर्गम जिले पिथौरागढ़ में कीचड़ और मलबे से पटी बदहाल सड़क पर एंबुलेंस की आवाजाही नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को कनारी पाभैं निवासी रतन सिंह (76) परिजनों के साथ डायलिसिस के लिए अस्पताल जा रहे थे। घंटाकरण के पास सड़क के क्षतिग्रस्त होने से एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी और चालक ने मरीज को वहीं उतार दिया गया। ऐसे हालातों में बेबस परिजन उन्हें किसी तरह पीठ पर ढोकर एक किलोमीटर दूर बेस अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज शुरू करने से कुछ ही देर में रतन हमेशा के लिए दर्द और पीड़ा से आजाद हो गए।
दरअसल घंटाकरण के पास बीते वर्ष अक्तूबर में 32 करोड़ रुपये से बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण शुरू हुआ। काम शुरू होते ही यहां भूस्खलन हुआ तो चंडाक और बेस अस्पताल को जोड़ने वाली दोनों सड़कें खतरे में आ गईं। यहां जगह उपयुक्त न होने की बात कर काम रोकते हुए इस लापरवाही पर पर्दा डाल दिया गया। बमुश्किल दो महीने पहले दोनों सड़कों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक कार्य शुरू हुए। इसके लिए बेस अस्पताल को जोड़ने वाली सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। लंबे समय बाद सड़क पर हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू हुई लेकिन इस पर एंबुलेंस के जाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। संवाद
आराेप
सड़क ठीक होती तो बच जाती जान
बदहाल व्यवस्थाओं की मार सहते हुए बुजुर्ग रतन को काल के गाल में समाना पड़ा। उनके परिजनों ने कहा कि सड़क ठीक होती तो वह मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाते। उनकी जान बच सकती थी। बेस अस्पताल में हर रोज 14 किडनी समस्या से जूझ रहे मरीजों की डायलिसिस होती है। इन्हें एंबुलेंस से ले जाया जाता है। सड़क पर एंबुलेंस की आवाजाही न होने से मरीजों को मजबूरन घंटाकरण के पास उतारना पड़ रहा है। यहां से वे कीचड़ और मलबे से पटी बदहाल सड़क पर पैदल सफर कर अस्पताल पहुंचने को मजबूर हैं।
आश्वासन
डीएम ने कहा- जल्द खुलवाएंगे सड़क
शुक्रवार को डायलिसिस कराने आए मरीजों को घंटाकरण में उतार दिया गया। यहां से मरीज और इनके परिजन पैदल अस्पताल पहुंचे। बाद में मरीजों और परिजनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को आपबीती सुनाई और सड़क खोलने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि साहब हमें रोजाना डायलिसिस करानी है, प्लीज सड़क खुलवा दीजिए। एंबुलेंस की आवाजाही ठप होने से हमें इस हालत में कीचड़ और मलबे से पटी बदहाल सड़क पर पैदल सफर कर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। डीएम ने जल्द सड़क खुलवाने का आश्वासन दिया।
कोट
डायलिसिस के लिए लाए गए मरीज की हालत गंभीर थी। अस्पताल पहुंचते ही उसे ऑक्सीजन लगाकर इलाज शुरू किया गया। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। मरीजों को बेहतर इलाज मिले, इसके लिए प्रबंधन गंभीर है।
- डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़।
कोट
बेस अस्पताल को जोड़ने वाली सड़क पर सुरक्षात्मक कार्य पूरा हो गया है। शुरू में मिट्टी से रैंप बनाया गया था, इसे हटा दिया है। अब सड़क पर एंबुलेंस सहित अन्य हल्के वाहन आवाजाही कर सकेंगे।
- दिनेश जोशी, एई, लोनिवि, पिथौरागढ़।