पिथौरागढ़। गर्मी बढ़ने के साथ ही सीमांत जिले में वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जंगलों में आग की चार से 10 घटनाएं रोज हो रही है। इस सीजन में अब तक आग की 69 घटनाओं में 105.50 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। पिछले वर्षों तक जहां चीड़ के जंगलों में ही आग लगने की अधिक घटनाएं होती थी, वहीं इस बार चौड़ी पत्ती वाले बांज के जंगल भी धधक रहे हैं।
जिले में चीड़ के पिरूल से सुलग रही आग बांज के जंगलों को भी चपेट में ले रही है। बांज नमी वाले क्षेत्रों में होता है। इस बार जाड़ों में बारिश नहीं होने से बांज के जंगलों में गिरी पत्तियाें की नमी समाप्त हो चुकी है। ऐसे में इन जंगलों में भी तेजी से आग फैल रही है। नैनीपातल, कुनकटिया, डीडीहाट, गंगोलीहाट, अस्कोट, बेड़ीनाग, नाचनी के राया और गुटी पोर्थी के जंगल धधक रहे हैं। आग से बहुमूल्य वन संपदा के साथ ही जैव विविधता और वन्यजीवों को भी नुकसान हो रहा है। साथ ही चारों ओर छाई धुंध से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आरक्षित वन में आग लगने की 23 घटनाएं
पिथौरागढ़। जिले में आग लगने की 23 घटनाएं आरक्षित और 46 सिविल व पंचायती वनों में हुई हैं। आरक्षित में 33 और सिविल में 72.50 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। आग से 2,60,500 रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। बीते दिन आग लगने की चार घटनाएं हुईं। इनमें गंगोलीहाट के जजूट, रावलगांव, बेड़ीनाग के चौकोड़ी कक्ष संख्या आठ और पिथौरागढ़ के गुरना सिविल वन पंचायत में आग लगी। संवाद
आग रोकने में वन विभाग भी असमर्थ
नाचनी/गणाई गंगोली। रामगंगा घाटी स्थित तल्ला जोहार क्षेत्र के साथ ही बागेश्वर जिले के दर्जनों आरक्षित वन आग से नष्ट हो गए हैं। वन विभाग आग को रोकने में असमर्थ सा दिख रहा है। समूची घाटी गहरे धुंध से पटी है। जंगल जलने से संबंधित जगहों पर पशु-पक्षी, कीट-पतंगों के अलावा जैव विविधता खत्म हो चुकी है। यदि मानसून काल में अतिवृष्टि हुई तो क्षेत्र में तबाही आ सकती है। उधर चामी भैसकोट में लगी आग को वन दरोगा रमेश लोधियाल के नेतृत्व में काबू पाया गया। उधर गणाई गंगोली के सेराघाट क्षेत्र के नैली गांव के जंगल में लगी आग घरों के पास तक पहुंच गई। आग से गणेश सिंह, पुष्कर सिंह के घास के चार लुट्टे जल कर नष्ट हो गए। उन्होंने मुआवजा देने और जंगलों को आग से बचाने का अनुरोध किया है। संवाद
कोट
वनाग्नि पर काबू पाने के लिए टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। आग की सूचना पर विभागीय कर्मी तुरंत मौके पर पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों से भी आग को बुझाने में सहयोग की अपील लगातार की जा रही है। - आशुतोष सिंह, डीएफओ पिथौरागढ़।
औषधीय पेड़-पौधों से लेकर पशु पक्षियों पर संकट
पिथौरागढ़। जिले के जंगलों में बड़ी संख्या में औषधीय महत्व के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। इनमें आंवला, हरड़, पीपल, तिमूर, गिलोय आदि शामिल हैं। इसके अलावा जंगलों में बांज सहित अन्य पेड़-पौधों से चारा लिया जाता है। आग के कारण पेड़-पौधे जल जाने से जैव विविधता को बड़ा नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा पहाड़ के जंगलों में निवास करने वाले घुरड़, काकड़ और तेंदुओं के अलावा मोनाल पक्षी पर भी संकट मंडराने लगता है। इन दिनों पेड़ की टहनियों और झाड़ियों में पक्षी अंडे देते हैं। आग की लपटों से पक्षियों के अंडे या चूजे घोंसलों में ही जलकर नष्ट हो जाते हैं। कई बार पशु-पक्षी भी जलकर मर जाते हैं। पर्यावरण प्रेमी डॉ. पीतांबर अवस्थी कहते हैं कि आग लगने से वनजीवों को बड़ा नुकसान पहुंचता है। कई स्थानों पर आग से फर्न भी नष्ट हो जाता है। इससे जैव विविधता पर खतरा मंडराने लगता है। तपिश बढ़ने से जलस्रोतों का पानी कम होने लगता है। भीषण आग में अनेक प्रजातियों के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की प्रजातियों के विलुप्त होने की आशंका रहती है। संवाद
दो माह में 9.12 हेक्टेयर जंगल जलकर जला
चंपावत। फायर सीजन का दो माह से अधिक का समय बीत गया है। इन दो महीनों में चंपावत डिविजन में आग की 12 घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें 9.12 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। गनीमत रही कि इस बार आग की घटनाएं अभी कम देखने को मिली हैं। विभाग की ओर से वनाग्नि को रोकने के लिए 54 क्रू स्टेशन और 216 फायर वाचर तैनात किए गए हैं। डीएफओ आरसी कांडपाल ने बताया कि जंगलों में लगने वाली आग को बुझाने के लिए विभागीय कर्मी दिन-रात जुटे हुए हैं। संवाद
पाटी क्षेत्र में लगातार जल रहे जंगल
पाटी/चंपावत। पाटी क्षेत्र के जंगलों में लगातार लग रही आग के कारण वन संपदा को काफी नुकसान पहुंच रहा है। आग लगने से क्षेत्र में धुआं फैला हुआ है। इससे दृश्यता भी बेहद कम हो रही है। कई जगहों पर 25 मीटर के बाद कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। सोमवार रात को पाटी की वन चौकी से लगभग 500 मीटर नीचे जंगल में आग लग गई। हवा के कारण आग क्षेत्र में और अधिक फैलती गई। आग के चलते मंगलवार सुबह तक पटनगांव, चौड़कोट और सुनडुंगरा क्षेत्र में धुंध छाई रही। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ा। डीएफओ आरसी कांडपाल ने बताया कि विभाग के कर्मी सूचना पर आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने लोगों से जंगलों आग नहीं लगाने की अपील की है। संवाद
आग से पुजारियों की निजी पाइप लाइन जली
टनकपुर (चंपावत)। बूम वन रेंज के अंतर्गत पूर्णागिरि क्षेत्र के जंगलों में आग लगने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। आग से आधा दर्जन से अधिक पुजारियों के प्लास्टिक की निजी पेयजल लाइन भी जल कर नष्ट हो गई। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मंगलवार को मां पूर्णागिरि क्षेत्र से सटे सनमुणा और दौ के जंगलों में अचानक आग लग गई। इससे उक्त क्षेत्र में बिछाई गई पंकज तिवारी, भैरव पांडेय, कृष्णा तिवारी, मथुरा दत्त पांडेय, प्रकाश तिवारी, रमेश तिवारी, महेश पांडे आदि की निजी पाइप लाइन जलकर नष्ट हो गई। वन बीट इंचार्ज राकेश गिरि आदि के मुताबिक सनमुणा में नाप चेक में ग्रामीणों ने कूड़ा जलाने के लिए आग लगाई थी। आग को काबू कर लिया गया है। आग बुझाने में वन कर्मी भरत सिंह, फायर वाचर मोहन, जगत, नंदन, पानू, रोहित, ग्रामीण महेश, जगदीश आदि मौजूद रहे। वन कर्मियों ने ग्रामीणों ने चारा पत्ती को लेकर वनों में आग न लगाने की अपील की है। संवाद
फोटो- 23टीएनपी07पी।
धुएं से आंखाें में खुजली और जलन की शिकायतें बढ़ीं
चंपावत। जंगलों में लगी आग से निकल रहे धुएं से लोगों की आंखों में खुजली और जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं। पिछले कुछ दिनों से हर रोज 20 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में वातावरण में फैले धुएं के कारण लोगों की आंखों में संक्रमण हो रहा है। इससे खुजली और जलन होने के साथ ही आंखें लाल हो जा रही हैं। जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शौर्य ने बताया कि जंगलों में आग से जहां वन संपदा जल रही है वहीं आंखों में समस्या भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को धुएं वाले क्षेत्र में जाने से बचना चाहिए। समय-समय पर चेहरे को धोना चाहिए। अधिक समस्या होने पर चिकित्सक को दिखाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर दवा लेने से बचना चाहिए। बिना परामर्श दवा का उपयोग ठीक नहीं है। संवाद
कूड़ा जलाना बंद नहीं करने पर न्यायालय जाने की चेतावनी
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने नगरपालिका और ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह कूड़ा जलाने के मामले की डीएम से शिकायत की है। उन्होंने कहा है कि न्यायालय के निर्देश पर कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद जिले में कूड़ा जलाया जा रहा है। उन्होंने इस पर तत्काल रोक नहीं लगाए जाने पर न्यायालय जाने की बात कही है।
मर्तोलिया ने कहा है कि नगर में जगह-जगह प्लास्टिक कचरा जलाया जा रहा है। इससे प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। सड़कों या गलियों में कूड़ा जलाने से सुबह के समय घूमने के लिए निकलने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाे रही है। जिला पंचायत की ओर से लगाए गए कूड़ेदानों की सफाई नहीं होने से कूड़े को कूड़ेदानों में ही जलाया जा रहा है। उन्होंने डीएम से इस तरह से कूड़ा जलाने पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जिला प्रशासन ने तत्काल कदम नहीं उठाया तो वह जनसहयोग से हाईकोर्ट में कूड़ा जलाने के प्रमाणों के साथ जनहित याचिका दायर करेंगे। संवाद
प्राथमिक विद्यालय नैनथल के भवन की छत जली
संवाद न्यूज एजेंसी
नाचनी (पिथौरागढ़)। जंगल में लगी आग से प्राथमिक विद्यालय नैनथल के भवन की छत जल गई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आग लगाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
नाचनी क्षेत्र के नापड़ ग्राम पंचायत के नैनथल का प्राथमिक विद्यालय छात्र संख्या शून्य होने से वर्ष 2020 में बंद हो गया था। नैनथल में पूर्व में लगभग 20 परिवार रहते थे। सभी परिवारों के यहां से मैदानी क्षेत्रों में पलायन करने के बाद गांव वीरान हो गया है। गांव में किसी परिवार के नहीं रहने से विद्यालय भी बंद हो गया। इस विद्यालय भवन के खिड़की-दरवाजों की लकड़ी पहले ही सड़-गल कर नष्ट हो चुकी हैं। भवन के आसपास घास उगी थी। बीती 19 अप्रैल की रात को भवन की छत भी आग लगने से जल गई।
बताया जा रहा है कि आसपास के जंगलों में आग लगी थी। तेज हवा के साथ चिंगारी भवन की छत में गिरने से सूखी घास ने आग पकड़ी और लकड़ी व टिन की छत पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गई। क्षेत्रवासियों को इस घटना का पता सुबह चला। मुनस्यारी के बीईओ डिगंबर लाल आर्या ने बताया कि विद्यालय वर्ष 2020 में बंद हो गया था। भवन के फर्नीचर, सामग्री और दस्तावेज अन्यत्र शिफ्ट कर दिए गए थे। आग से हुई क्षति का आकलन कर विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर आग लगाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। संवाद