कैलास मानसरोवर यात्रा-2016 के प्रथम बैच के लिए चयनित सभी 60 यात्री शुक्रवार को दिल्ली में होने वाले प्रथम चरण के मेडिकल परीक्षण के लिए पहुंचे हैं। मेडिकल परीक्षण शनिवार को भी होगा। उसके बाद ही यह पता चलेगा कि प्रथम बैच के लिए कितने यात्रियों का चयन हुआ है। कुमाऊं मंडल विकास निगम के पास शनिवार शाम तक प्रथम बैच में शामिल यात्रियों की सूची पहुंच जाएगी। प्रथम बैच 12 जून को सुबह दिल्ली से काठगोदाम के लिए चलेगा और अपरान्ह एक बजे काठगोदाम पहुंचेगा। कुछ देर वहां रुकने के बाद यात्री रात्रि विश्राम के लिए अल्मोड़ा पहुंचेंगे। 13 जून की सुबह यात्री अल्मोड़ा से आधार कैंप धारचूला को निकलेंगे। यात्रियों का नाश्ता धौलछीना और लंच डीडीहाट में होगा।
केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि यात्रियों का रूट अल्मोड़ा से सेराघाट, बेड़ीनाग, थल, डीडीहाट, ओगला होते हुए धारचूला तक का है। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय मिर्थी में यात्रियों की ब्रीफिंग होगी। धारचूला से यात्रियों को तवाघाट होते हुए नारायणआश्रम तक वाहनों से ले जाया जाएगा। पहला पैदल पड़ाव सिर्खा में रहेगा। दूसरा पड़ाव गाला, तीसरा बूंदी, चौथा गुंजी, पांचवां नाभीढांग होगा। हर पड़ाव में कर्मचारी पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा के रूट में इस समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। पूरा पैदल मार्ग सही हालत में है।
गुंजी से आगे वाहन से यात्रा तय नहीं
पिथौरागढ़। काफी पहले से यह तय किया जा रहा था कि इस बार यात्रियों को गुंजी से कालापानी तक 18 किलोमीटर का सफर वाहनों से कराया जाएगा, लेकिन अब तक केएमवीएन गुंजी तक हेलीकॉप्टर से वाहन नहीं पहुंचा पाया है। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि इस बार गुंजी से वाहन चला पाना संभव नहीं हो पा रहा है। यह दूरी भी यात्री पैदल ही तय करेंगे।
अगले साल गुंजी तक बनेगी रोड
पिथौरागढ़। तवाघाट से मांगती होते हुए गुंजी के लिए सड़क निर्माण का काम अब 24 किलोमीटर के करीब बचा है। गुंजी से आगे तिब्बत सीमा की तरफ कालापानी तक सड़क बन गई है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अगले साल तक कैलास यात्रा और सुगम होने के बारे में इसी आधार पर बयान दिया है कि तब तक शेष सड़क का निर्माण हो जाएगा। सांसद अजय टम्टा ने बताया कि गुंजी तक सड़क निर्माण का काम हर हाल में 2017 के शुरुआत तक पूरा हो जाएगा और यात्री धारचूला से गुंजी तक वाहनों से सफर करेंगे।
लमारी से बूंदी तक का रास्ता सबसे कठिन
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। आईटीबीपी ने लमारी से बूंदी तक के पैदल रास्ते को सबसे कठिन श्रेणी में रखा है। इन स्थानों पर आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम तैनात रहेगी। इस रास्ते पर छह बरसाती नाले पड़ते हैं। नंफा नाला उनमें सबसे खतरनाक है। आईटीबीपी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि गुंजी से लिपुलेख तक यात्रियों की सुरक्षा आईटीबीपी के महिला और पुरुष जवान करेंगे। जवानों की टीम पहले ही गुंजी पहुंच चुकी है। कैलास मानसरोवर यात्रा ठीक मानसून सीजन में होती है। ऐसे में बरसाती नाले अक्सर उफान पर आ जाते हैं।