सीमांत इंजीनियरिंग कालेज को आल इंडिया काउंसिल आफ टेक्नीकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की मान्यता दिलाए जाने का मुद्दा एक बार फिर से मुखर होने लगा है। पिछले साल भी इसी मुद्दे पर छात्रों ने कई दिनों तक आंदोलन किया था। हाल ही में सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमांत इंजीनियरिंग कालेज को एआईसीटीई की मान्यता नहीं है। बुधवार को छात्रों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संयोजक हिमांशु वर्मा, जिला संयोजक रोहित ओझा, तकनीकी सेल के जिला संयोजक अभिषेक मेहता आदि ने कहा कि सीमांत इंजीनियरिंग कालेज की स्थापना 2011 में हुई थी। तब इसे उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का संघटक कालेज घोषित किया गया। बाद में जब छात्रों ने एआईसीटीई की मान्यता की मांग उठाई तो उनको हर बार गलत जानकारियां दी गई। हाल ही में सरकार ने जो रिपोर्ट जारी की है उसमें कहा गया है कि इस कालेज को एआईसीटीई की मान्यता ही नहीं है।
कालेज में एक हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। यदि एआईसीटीई की मान्यता नहीं मिली तो इनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। प्रदर्शन में ललित अवस्थी, अमित जोशी, छात्रसंघ अध्यक्ष जगदीश लुंठी, विकास पुनेड़ा, जीवन पाटनी, बृजमोहन, सुनील उप्रेती, मयंक भट्ट, सूरज, सागर समेत तमाम विद्यार्थी थे। जिलाधिकारी कार्यालय के डिप्टी कलक्टर केके मिश्रा ने कहा है कि इस मामले में वस्तुस्थिति की जानकारी हासिल की जाएगी।