पिथौरागढ़। सर्दी का मौसम शुरू होते ही जिले की विभिन्न सड़कों पर पाला गिरने लगा है। सड़कों पर जमे पाले में वाहनों के फिसलने का खतरा भी बढ़ गया है। जिले के आधा दर्जन रूटों पर सबसे अधिक पाला गिरता है। इससे आए दिन वाहन फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। इसके बावजूद कई रूटों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं।
पर्वतीय क्षेत्र की सड़कों पर सर्दी के मौसम में पाला गिरने से वाहनों के संचालन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रात में जमा पाला जमने के कारण सुबह के समय सड़कों पर शीशे जैसी चादर बिछ जाती है। इसके चलते वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है। इसमें सबसे अधिक दोपहिया वाहन रपटते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए जाते हैं। पाला गिरने वाले स्थानों में सबसे अधिक सुबह के समय दुर्घटनाएं होती हैं। निर्माणदायी संस्थाओं ने अधिकतर स्थलों पर चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए हैं।
पाला संभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाया जाना जरूरी है, ताकि वाहन चालक सावधानीपूर्वक आवागमन कर सकें। जिन सड़कों में यह समस्या है संबंधित विभागों को चेतावनी बोर्ड लगाने और पाले से बचाव के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे।
- आरडी पालीवाल, अपर जिलाधिकारी, पिथौरागढ़।
जिले की इन सड़कों में गिरता है पाला-
सड़क मार्ग - पाला गिरने वाले स्थान
पिथौरागढ़- धारचूला - नैनीपातल, सतगढ़
पिथौरागढ़- बड़ाबे - सिलिंग से बड़ाबे
गंगोलीहाट- बेड़ीनाग - जाड़ापानी, भगौर
डीडीहाट- थल - घोरपट्टा, घिमाली बैंड
डीडीहाट- ओगला - नारायणनगर और मिर्थी के बीच।
पिथौरागढ़- घाट - सिद्धेश्वर मंदिर क्षेत्र, एक्वा पैराडाइज