मौसम की प्रतिकूल स्थितियों के कारण इस साल दावाग्नि का प्रकोप अधिक होने की आशंका है। वन विभाग 15 फरवरी से फायर सीजन घोषित करता है, लेकिन इस बार एक महीना पहले ही जिले के जंगल धधकने लगे हैं। तल्ला जोहार के अंतर्गत देकुना वन पंचायत के जंगल में शुक्रवार रात लगी आग ने कम से कम 400 हेक्टेयर एरिया को अपनी चपेट में ले लिया है।
आग बुझाने के लिए न तो वन विभाग ने और न वन पंचायत ने ही कोई प्रयास किया।
बताया गया है कि आग शुक्रवार शाम करीब छह बजे से लग गई। इसने पूरी रात खोयम तक के जंगल को चपेट में ले लिया। आग से छोटे पौधों को नुकसान पहुंचा है।
देकुना का यह वन पंचायत जंगल हर साल आग की चपेट में आता है। लोग अच्छी घास के लालच में जंगल में आग लगा देते हैं। आग से पूरे इलाके में धुआं फैल गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अभी से दावाग्नि की यह स्थिति है तो गर्मी में हालत बेकाबू हो जाएंगे।
लंबे समय से बारिश न होने के कारण जंगलों की आग सूख चुकी है। चीड़ की पत्तियां (पिरूल) समय से पहले गिरने लगी हैं। वन पंचायत के जंगल में लगी यह आग शनिवार सुबह तब तक नहीं बुझी जब तक उसने सारे जंगल को अपनी चपेट में नहीं ले लिया।