यहां एक परिवार के तीन लोगों की छह महीने के भीतर मौत से लोग सकते में हैं। नाचनी के भैंसखाल निवासी भवान सिंह कोरंगा के बड़े भाई 62 वर्षीय चंद्र सिंह 7 अगस्त 2015 को जानवर चुगाने जंगल थे, जहां भारी बारिश होने से जंगल में ही उनकी मौत हो गई थी। ठीक चार माह बाद 7 जनवरी 2016 को 96 वर्षीय माता दुर्गा देवी की मौत हो गई थी। मां की मौत के 25 दिन बाद भवान सिंह कोरंगा (56) की दिल्ली में इलाज के दौरान 1 फरवरी 2016 को मौत हो गई। बुधवार को रामगंगा नदी के किनारे हरड़िया में कोरंगा का अंतिम संस्कार किया गया। छह महीने में परिवार में तीन मौतों से भवान सिंह कोरंगा के पुत्र मुकुंद और गुड्डू का भरण-पोषण उनकी पत्नी आनंदी देवी के जिम्मे आ गया है।
उनके करीबी मित्र भाजपा नेता खुशाल सिंह पिपलिया ने बताया कि वह मां की मौत के ठीक एक सप्ताह बाद बीमार पड़ चुके थे। वह एक कुशल प्रगतिशील किसान और फुटबाल खिलाड़ी थे। ग्राम प्रधान चंद्रकला देवी ने कहा कि उनकी मौत से परिवार के साथ ही गांव को क्षति पहुंची है। वह वर्ष 2000 से नाचनी में संत निरंकारी मिशन जुड़े थे। अंतिम संस्कार के समय संत निरंकारी मिशन हल्द्वानी मंडल के एसएस रावत, केएन भट्ट, प्रताप सिंह बिष्ट, लखन तिवारी, अल्मोड़ा से केएस रैकुनी, बागेश्वर से तिल राम आर्य, पिथौरागढ़ से जीवन फर्त्याल, शेखर गुरु, निर्विकार सिंह आदि थे।