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इंडियन आइडियल के चौथे राउंड में पहुंचा है दृष्टिहीन सुंदर

Wed, 03 Dec 2014 05:31 AM IST
Pithoragarh
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पिथौरागढ़। कहते हैं भगवान किसी के भी सारे रास्ते बंद नहीं करता, कुछ न कुछ ऐसा हुनर देता है, जिससे जिंदगी की गाड़ी खिंच जाती है। बेड़ीनाग विकासखंड के बड़ेत निवासी सुंदर बाफिला को ही देख लीजिए, जन्म से दृष्टिहीन सुंदर आज सीमांत के हर उत्सव की जान होता है। बेहतरीन कंठ का धनी सुंदर अपनी सुरीली आवाज के बूते इंडियन आईडियल के चौथे राउंड तक पहुंचने में कामयाब रहा।
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11 अगस्त 1987 बड़ेत में पिता गणेश सिंह, माता कलावती देवी के घर जन्मे सुंदर के पैदा होने के बाद माता-पिता दृष्टिहीन पुत्र पाकर निराश हो गए थे, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ जब सुंदर की कुसाग्र बुद्घि माता-पिता ने देखी तो उनका दुख कुछ कम हो गया। सुंदर अपने सारे काम स्वयं करने लगा, रेडियो पर गाने सुनकर उनको हूबहू गाने लगा। धीरे-धीरे सुंदर सार्वजनिक मंचों में प्रस्तुति देने लगा। आज पिथौरागढ़ का शरदोत्सव हो या झूलाघाट महोत्सव, थल का मेला या कोई अन्य उत्सव, सुंदर की डिमांड हर जगह रहती है।
सुंदर अक्सर जाने वालो जरा मुड़के देखो इधर, मैं भी इंसान हूं तुम्हारी तरह गीत सुनाया करता है। सुंदर के लगन का ही कमाल कहेंगे कि वर्ष 2010 में वह इंडियन आइडियल के चौथे राउंड में पहुंचा था। बताता है कि तब 80 हजार प्रतिभागियों में बेस्ट 100 में चयन हुआ था। नोयडा के सेक्टर 62 में हुए आडिशन में मुख्य जज अन्नू मलिक, सुनिधि चौहान से खूब तारीफ मिली थी, यह उसकी जिंदगी का यादगार पल है। सुंदर की और खासियतों की बात करें तो वह मोबाइल फोन में नंबर स्वयं फीड कर देता है। किसी का भी नंबर मिला लेता है। सुंदर चाहता है कि पहाड़ में ब्रेल लिपि के विद्यालय सभी स्थानों में खुलने चाहिए, ताकि दृष्टिहीन लोग हुनरमंद बन सकें और उनको जिंदगी बोझ न लगे।
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