पिथौरागढ़। पाकिस्तान ने एक बार फिर दगा दिया है। कुछ महीने पूर्व दो सैनिकों के सिर काटने के बाद उसने फिर भारत की पीठ पर छुरा घोंपा है, लेकिन सरकार बार-बार उस के झांसे में आ रही है। शांति प्रक्रिया पर ब्रेक न लगे, इसके लिए भारत ऐसे हमले बर्दाश्त कर रहा है और मुंहतोड़ जवाब नहीं देने की उसकी प्रवृत्ति को कमजोरी माना जा रहा है। दगाबाज पाक को सख्त जवाब देना चाहिए। ये गुस्से के उदगार पूर्व सैनिकों के हैं। पुंछ में पाकिस्तानी सेना और आतंकियों द्वारा पांच भारतीय फौजियों की हत्या की खबर से पूर्व फौजियों में जबर्दस्त नाराजगी है।
इजरायल जैसी कार्रवाई जरूरी : कर्नल गुलेरिया
तीन लड़ाई लड़ चुके राष्ट्रीय सैनिक संस्था के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल एसपी गुलेरिया का कहना है कि पाकिस्तान के साथ कूटनीति राह बेमानी है। पाक लगातार अघोषित युद्ध कर रहा है और जवाबी कार्रवाई के बजाय भारत मौन है। कर्नल गुलेरिया का कहना है कि भारत को इजरायल जैसे छोटे देश से सीखना चाहिए। फौज के मनोबल को बचाने के लिए कारगर जवाबी कार्रवाई जरूरी है।
कठोर कदम का वक्त : कै. रावत
1971 की जंग लड़ चुके कैप्टन धन सिंह रावत कहते हैं कि कमजोर नेतृत्व भारत की एकता और अखंडता पर भारी पड़ सकता है। 1971 में इंदिरा गांधी ने आंख दिखा रहे पाक के दो टुकड़े कर दिए। ऐसा ही कदम अब भी उठाना होगा।
नापाक करतूत पर चुप्पी गलत : शमशेर
पूर्व फौजी शमशेर सिंह महर का कहना है कि भारत को पाकिस्तान को जवाब देना ही होगा। पाक बार-बार नापाक करतूत कर रहा है लेकिन हम ताकतवर होते हुए भी उसके आगे बेबस नजर आ रहे हैं।