पिथौरागढ़। प्रतिभा हो तो तमाम अभाव, परेशानी यहां तक की अंधता को भी मात दी जा सकती है। इस बात को सही साबित कर दिखाया है बेरीनाग विकासखंड के बड़ेत गांव के जन्मांध गायक सुंदर बाफिला ने। ग्रामीण परिवेश और तमाम प्रकार की दिक्कतों के बावजूद 27 साल का यह युवा सोनी टीवी के शो इंडियन आइडियल में चौथे राउंड तक का सफर तय कर चुका है। हर बार की तरह ही इस बार भी सुंदर पिथौरागढ़ के शरदोत्सव में था तो लोगों ने उसके मधुर कंठ से निकले गीतों का खूब आनंद लिया।
दूसरे आंखों से दुनिया देखने वाला सुंदर गोपाल बाबू गोस्वामी, नरेंद्र सिंह नेगी जैसे नामचीन लोक गोयकों के गीतों को हू-ब-हू गा लेता है। उसे मुकेश दा और रफी साहब के गीतों को गाने में महारत हासिल है। सुंदर 2010 में इंडियन आइडियल का सफर तय कर मुंबई तक पहुंचा था। सुंदर ने बताया कि तब इंडियन आइडियल के लिए देश के 80 हजार लोगों ने आवेदन किया था। चुने गए 100 युवा गायकों में वह शामिल था। चौथे राउंड में उसे बाहर होना पड़ा। सुंदर का जन्म 1985 में बेरीनाग तहसील मुख्यालय से 9 किमी की दूरी पर स्थित बडे़त गांव में गणेश सिंह बाफिला के घर में जुड़वा संतान के रूप में हुआ। सुंदर के साथ जन्मी बहन स्वस्थ थी। उसका विवाह भी हो चुका है।
गायकी की ओर रुझान के संबंध में सुंदर कहते हैं कि आज से 10 साल पहले रेडियो और टीवी पर गाने सुनने के बाद उसे गायकी का शौक चढ़ा। गाना शुरू किया तो लोग पसंद करने लगे। अपने गायकी के हुनर के विकास में सुंदर थल निवासी राज्य आंदोलनकारी गजेंद्र सिंह गंगू का अहम योगदान मानते हैं। बताया कि गंगू ने ही सबसे पहले उन्हेें थल की रामलीला में मंच उपलब्ध कराया। उसके बाद मंचीय प्रदर्शन का सिलसिला चल पड़ा। सभी को प्यार से रहने की सीख देने वाला यह होनहार गायक कहता है कि अब उनका ध्यान पूरी तरह भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखने की ओर है। किसी सद्गुरु की तलाश है।