पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल में हर महीने दो सौ से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। पिछले आठ माह में अस्पताल में 1911 बच्चे पैदा हुए हैं, इनमें 1001 लड़के और 920 लड़कियां हैं। यह आंकड़े लिंगानुपात की सुधरती स्थिति को भी दर्शाते हैं। एक समय था जब जिले में पुरुषों की अपेक्षा महिला अनुपात चिंताजनक स्थिति पर पहुंच गया था।
पांच वर्ष पहले जिले का लिंगानुपात प्रति एक हजार पुरुष पर 881 महिला हो गया था। वर्ष 2017 में जिले में एक हजार बालकों में बालिकाओं की संख्या 900 हो गई। अब इस स्थिति में कुछ और सुधार आया है। जिला महिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2018 में 80 लड़कियां और 55 लड़के अस्पताल में पैदा हुए।
मई में 86 लड़कियां, 111 लड़के, जून में 119 लड़कियां, 101 लड़के, जुलाई में 132 लड़कियां, 135 लड़के, अगस्त में 125 लड़कियां, 150 लड़के, सितंबर में 131 लड़कियां, 155 लड़के, अक्तूबर में 115 लड़कियां, 154 लड़के, नवंबर में 132 लड़कियां और 140 लड़के पैदा हुए।
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद तक सृजित नहीं
पिथौरागढ़। आधी आबादी के स्वास्थ्य देखभाल के लिए खोले गए जिले के सबसे बड़े अस्पताल में दो दशक पहले अल्ट्रासाउंड मशीन तो लगा दी गई, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का पद तक सृजित नहीं किया गया। वर्तमान में प्रत्येक बुधवार को चंपावत अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल में आकर अल्ट्रासाउंड कराते हैं। अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ऊषा गुंज्याल इस समय जिले की मुख्य चिकित्साधिकारी हैं। एनेस्थेटिस्ट का पद एक सितंबर 2015 से रिक्त है। 6 अक्तूबर 2018 से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद रिक्त है। इस पद का प्रभार मुख्य बाल रोग विशेषज्ञ के पास है। नियोनेटल केयर विंग में भी बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। चीफ फार्मासिस्ट का एक, वार्ड आया के दो, उपचारिका का एक पद रिक्त है।
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित करने के साथ ही रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं। -डॉ. जेएस नबियाल, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी, महिला अस्पताल