पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध के लिए प्राधिकरण बनाने की सूचना मिलते ही महाकाली नदी के किनारे बसे प्रभावित गांव के लोगों ने प्राधिकरण में शामिल करने की मांग की है। महाकाली के किनारे बसे गांवों के लोगों ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी के सम्मुख इस मांग को रखा। प्राधिकरण में शामिल न करने पर क्षेत्र के लोगों ने आंदोलन की धमकी दी है।
महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले दिनों विस्थापित होने वाले परिवारों की भूमि के अधिग्रहण और डूब क्षेत्र के आकलन के लिए विकास प्राधिकरण बनाने की बात कही थी। इसमें पुनर्वास सिंचाई, ऊर्जा, वन एवं राजस्व विभाग को मिलाकर प्राधिकरण बनाने की बात कही थी। इसी को देखते हुए महाकाली नदी घाटी के किनारे रहने वाले माजिरकांडा, झूलाघाट, कानड़ी, सीमू आदि गांवों के लोगों ने प्राधिकरण में डूब क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के सक्रिय समाजसेवियों और प्रभावित परिवार के सदस्यों को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही है।
समिति के सदस्य माजिरकांडा ग्राम प्रधान सुरेंद्र आर्या ने कहा कि पंचेश्वर डूब क्षेत्र के लोगों को टिहरी बांध पुनर्वास प्राधिकरण के साथ जोड़ना ठीक नहीं है। जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि पंचेश्वर बांध प्रभावितों के लिए अलग प्राधिकरण बनाया जाए। यदि सरकार ने प्रभावितों के साथ धोखा किया तो बड़ा आंदोलन होगा। जिलाधिकारी से मिलने वालों में ग्राम प्रधान कानड़ी लक्ष्मण चंद, कमल चंद, काशी चंद, जनक चंद, दिलीप चंद, शेखर भट्ट, पवन कुमार भट्ट, प्रमोद भट्ट और युवक मंगल दल अध्यक्ष डब्बू गड़कोटी आदि मौजूद थे।