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कर्ज लेकर तनाव में आते जा रहे किसान

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कर्ज लेकर तनाव में आते जा रहे किसान
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पिथौरागढ़। पहाड़ पर बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों की संख्या कम नहीं है। कर्ज लेने के बाद समय पर अदायगी न होने से किसान तनाव में आते जा रहे हैं। बैंकों के आंकड़ों के अनुसार सहकारी समितियों के माध्यम से इस बार 12623 किसानों को 5.77 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया।

सहकारी समितियों से कर्ज हर फसल के लिए दिया जाता है। शर्त यह है कि पिछला कर्ज चुकता नहीं हुआ तो नई फसल के लिए कर्ज नहीं मिलेगा। छह महीने के लिए दिए जाने वाले इस कर्ज को अगली फसल को बोने से पहले जमा करना जरूरी है। जो किसान समय पर कर्ज नहीं चुकाते वह डिफाल्टर घोषित हो जाते हैं। ऐसे किसानों की संख्या 30 प्रतिशत तक रहती है। पिछले साल ऐसे किसानों की संख्या 400 से ज्यादा रही। उनको दूसरी फसल के लिए कर्ज नहीं मिल पाया।
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इसी तरह ग्रामीण बैंक ने इस बार 985 किसानों को 2.30 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। ग्रामीण बैंक से भी कृषि लोन देने का नियम एक समान है। किसान को नई फसल आने से पहले पुराना कर्ज जमा करना जरूरी है। कर्ज लेने के बाद किसान कुछ समय तो खुश रहता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से फसल बर्बाद हो जाए तो उसका तनाव बढ़ने लगता है। बेड़ीनाग के डोलडुंगरी गांव के किसान सुरेंद्र सिंह की आत्महत्या के पीछे भी यही तनाव मुख्य कारण रहा।

वहीं, उद्यान विभाग किसानों को पॉलीहाउस लगाने के लिए 90 फीसदी तक सब्सिडी देता है। जिले में दो प्रकार के पॉलीहाउस लगाए जा रहे हैं। छोटे साइज के पॉलीहाउस की कीमत 40 हजार 400 रुपये होती है, इसमें किसान को करीब चार हजार रुपये देने पड़ते हैं, जबकि बड़े साइज के पॉलीहाउस की कीमत 1.20 लाख बैठती है, इसमें किसान को करीब 12 हजार रुपये देने पड़ते हैं। पिछले साल 40 किसानों को छोटे और पांच किसानों को बड़े पॉलीहाउस दिए गए थे। इस बार के लिए सिर्फ 30 पॉलीहाउस लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है।

बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए किसान पॉलीहाउस की मांग करते आए हैं, लेकिन उत्पादन को बाजार तक लाने की समस्या है। बेड़ा, गुरना, सिरकुच, मोस्टामानू, पुनेड़ी आदि स्थानों पर जो किसान सब्जी उत्पादन कर रहे हैं उनके सामने बाजार तक सामग्री पहुंचाने का संकट है। पॉलीहाउस में बंदरों का खतरा कम रहता है। हल्के स्तर के ओलों की मार से भी उनको नुकसान नहीं पहुंचता। उद्यान विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कैलाश चंद्र पंत का कहना है कि पॉलीहाउस लगाने के इच्छुक किसानों की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन विभाग इतनी मांग को पूरा नहीं कर पाता। इसके अलावा जिला योजना, बीएडीपी में भी किसानों को पॉलीहाउस दिए जाते हैं।

कृषि विभाग के पास किसानों को राहत देने के लिए सिर्फ बीज उपलब्ध रहते हैं। कृषि विभाग फसल चक्र के अनुसार मसूर, गेहूं, धान, सोयाबीन के बीज किसानों को बांटता है। इन फसलों को हर बार ओलों और जंगली जानवरों से नुकसान पहुंचता है। जिले में कृषि व्यवसाय के तौर पर नहीं है। यहां पर कोई भी किसान न तो ज्यादा जमीन का मालिक है और न वह अनाज का व्यापार ही करता है। कर्ज देने के लिए साहूकार वाली प्रथा जिले में नहीं है।
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सिर्फ राजनीति होती है फायदा नहीं
पिथौरागढ़। किसान संगठन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र जोशी, प्रकाश बोरा, दीवान सिंह का कहना है कि किसान की आत्महत्या के बाद राजनीति तो खूब हो रही है, लेकिन किसानों को इसका क्या फायदा मिलेगा कहा नहीं जा सकता। वह तो यहां तक कहते हैं कि कोई भी राजनीतिक दल ईमानदारी से किसानों का कर्ज माफ करने के पक्ष में नहीं दिखता। जो सत्ता से बाहर है वह विरोध करता है और जो सत्ता में है उसने चुप्पी साध रखी है।
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