पिथौरागढ़ में नौला फाउंडेशन की कार्यशाला में बोलते वक्ता
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डिग्री कॉलेज में नीर, नदी और नौले विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रदेश भर से आए वैैज्ञानिकों और पर्यावरणविद ने जलवायु परिवर्तन पर अपनी राय व्यक्त की। विशेषज्ञों ने तेजी से कम हो रहे जल स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि नौले-धारों को नहीं बचाया गया तो भविष्य में 90 प्रतिशत नदियां सूख जाएंगी।
उत्तराखंड विज्ञान, शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र देहरादून और नौला फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक दुर्गेश पंत ने कहा कि प्राकृतिक धरोहरों और संसाधनों का संरक्षण जरूरी है। नौला फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी वीत तमसो ने बताया कि जलवायु परिवर्तन ने पूरे विश्व का मौसम चक्र बिगाड़ दिया है। नौले-धारों और गधेरों का जल स्तर चिंताजनक स्थिति तक गिर चुका है।
फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विशन सिंह ने कहा कि नदियों को जीवित रखने के लिए नौले, धारों का संरक्षण जरूरी है। पर्यावरणविद् नवीन जोशी ने धरती का तापमान बढ़ने के लिए इंसानों को जिम्मेदार बताया। संचालन करते हुए इतिहासकार डॉ.हेमचंद्र पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड में सातवीं-आठवीं शताब्दी में बने नौले-धारों में आज भी पानी है। अधिक जनसंख्या से सीमित संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है।
कार्यशाला में प्राचार्य डॉ.डीएस पांगती, निदेशक दुर्गेश पंत, हेम चंद्र, कल्याण सिंह रावत, राजेंद्र बिष्ट, विपिन जोशी, हेमंत पांडेय, अनिल श्रीवास्तव, कमल किशोर, किशन भट्ट, गगन प्रकाश, खेम सिंह कठायत, संदीप मनराल, किशन कठायत, मनोज पांडेय आदि ने भी विचार रखे।