पिथौरागढ़। प्रशासन की जांच के बाद आंवलाघाट योजना में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। कार्यदायी संस्था ने निर्माण और संचालन में नियम-कायदों को ताख पर रख पेयजल संकट से जूझ रही पिथौरागढ़ की एक लाख की आबादी से धोखा ही नहीं किया। बल्कि सरकार को भी आर्थिक चोट पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ठेकेदार खुलेआम खामियों पर अपनी जिम्मेदारी से भागता रहा और अभियंता हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। नतीजतन 76 करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च कर बनाई गई आंवलाघाट पेयजल योजना शुरू होते ही फ्लॉप हो गई।
बहुप्रतीक्षित और चर्चित इस योजना की जांच के बाद आई डीएम की सात पन्नों की रिपोर्ट बेहद हैरान-परेशान करने वाली है। इस रिपोर्ट ने बड़े बजट की इस सरकारी योजना को अमलीजामा पहनाने में हुई भारी तकनीकी गड़बड़ियों को बेपर्दा कर दिया है। इससे योजना में भ्रष्टाचार की आंशका को भी बल मिल रहा है। डीएम की जांच रिपोर्ट से साफ हुई है कि ठेकेदार अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए अनुबंध की समयसीमा पूरा होने के इंतजार में था।
ठेकेदार खुलेआम दायित्वों से भाग रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे थे। यह भी साफ हुआ कि अभियंताओं का ठेकेदार पर कोई अंकुश नहीं रहा। इसके चलते ही आंवलाघाट योजना खामियों और अनियमितताओं का पुलिंदा बन गई। जांच में मिली तमाम खामियों के बीच 76 करोड़ से अधिक रकम कहां गई, पता नहीं।
जांच के निष्कर्ष
1. पेयजल योजना के दोनों वेल नहीं चल रहे। इससे पूरा पानी नहीं मिल पा रहा
2. पंप हाउस में 10 में से छह पंप खराब हैं। दो माह से इन्हें ठीक नहीं कराया
3. पंप हाउस में मिले अकुशल आपॅरेटर, पंपों में खराबी की आशंका
4. महीनों तक लावारिस पड़ी रही लाखों की सामग्री, जल्द खराब होने की संभावना
5. पंप हाउस में लॉगबुक नहीं होने से योजना के ट्रायल में संदेह
6. पानी निकासी की व्यवस्था नहीं, भूस्खलन और मशीन खराब होने की आशंका
7. जानबूझकर छोड़े पेयजल योजना के निर्माण कार्य अधूरे
बकसिल में भूस्खलन का खतरा
कार्यदायी संस्था और ठेकेदार की करतूतों से पेयजल योजना के साथ ही गांव भूस्खलन की जद में आ चुका है। डीएम को जांच के दौरान अन्य स्थलों की तरह ही बकसिल में भी अधूरे कार्य मिले। योजना स्थल में पानी की निकासी के बंदोबस्त तक नहीं कराया गया था। इससे बकसिल में भूस्खलन की आशंका बनी थी।
ठेकेदार को खामियों के सुधार का अल्टीमेटम दिया है। ठेकेदार न तय शर्तो के मुताबिक काम नहीं किया तो ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। विकास योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दास्त नहीं होगी। योजना की मॉनीटरिंग के लिए अब सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।
सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़