अस्कोट (पिथौरागढ़)। कस्तूरा मृग विहार में वन विभाग की ओर से संचालित जैव विविधता संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका सुधार परियोजना (बकरलिप) के तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जौलजीबी मेले में काफी मांग है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा जौलजीबी मेले में दन, कालीन, चुटका, पंखी, सौल, बनियान, डोके, रिंगाल की टोकरी और कृषिकरण से तैयार जड़ी बूटी स्थानीय लोगों के साथ ही विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
जौलजीबी मेले में लगे वन विभाग के अंतर्गत बकरलिप परियोजना के स्टाल पर दारमा घाटी की सविता तितयाल ने दन में नेपाल के 14 अंचलों का मानचित्र उकेरा है। बौन गांव के चैत सिंह बोनाल द्वारा उगाई गई जम्बू, गंद्रायणी, भूतकेष जड़ी, हर्बल टी, डोलू, कुटकी आदि की पहले दिन से ही काफी बिक्री हुई। वहीं मुनस्यारी एवं गोल्फा का आलू और राजमा भी लोगों को खूब भाया।
बकरलिप परियोजना के महेश पाल ने बताया कि मेले में सस्ते चाइनीज सामानों की उपलब्धता के कारण पारंपरिक उत्पादों की बिक्री में पिछले कुछ सालों से कमी आई है। पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण और उत्पादन को बढ़ाने के लिए परियोजना के तहत मृग विहार की अस्कोट, धारचूला और मुनस्यारी वन क्षेत्र की कुल 85 वन पंचायतों में दो सौ से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है।