पिथौरागढ़। 27 किमी पैदल और 138 किमी की दूरी वाहन से तय कर जिला मुख्यालय पहुंचे उच्च हिमालयी क्षेत्र नामिक के लोगों ने डीएम के सामने स्वीकृत सड़क का निर्माण नहीं होने समेत कई मुद्दे उठाए। नामिक के लोगों ने मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर लगातार गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही 30 अप्रैल तक समस्याओं का समाधान न होने पर एक मई को नामिक गांव से जिला मुख्यालय तक 165 किमी पैदल मौन जुलूस निकालने का ऐलान किया। नामिक के लोगों का सड़क का काम जल्द शुरू कराने के साथ ही अन्य समस्याओं का निदान कराने का आश्वासन मिला है।
नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह, पूर्व प्रधान खुशाल सिंह के नेतृत्व में डीएम से मिले शिष्टमंडल ने नामिक सड़क का निर्माण नहीं होने का मामला उठाया। कहा कि होकरा से नामिक के लिए स्वीकृत 17 किमी लंबी सड़क पर नाममात्र ही काम हुआ है। सड़क नहीं होने से गांव के लोगों को 27 किमी पैदल चलना पड़ता है। खड़ी चढ़ाई, तीव्र ढलान से होते हुए बिर्थी के पास द्वालीगाड़ तक आना पड़ता है।
डीएम सी रविशंकर ने पीएमजीएसवाई डिवीजन के अधिकारियों से सड़क की प्रगति की जानकारी मांगी। कार्यदायी संस्था की ओर से बताया गया कि वन भूमि निस्तारण न होने के कारण सड़क का काम रुका था। अब सड़क वन भूमि से मुक्त हो गई है। जल्द ही सड़क का काम शुरू हो जाएगा। वर्ष 2019 तक नामिक सड़क पहुंच जाएगी।
कहा गया कि 122 परिवार वाले नामिक में एएनएम सेंटर में एएनएम नहीं है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय पर टीके नहीं लग पाते। अस्पताल की सुविधा न होने से प्रसव के समय भी गांव के लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल पाती। गांव में संचार की कोई सुविधा नहीं। बैंकिंग सेवा का लाभ लेने के लिए गांव के लोगों को 35 किमी दूर क्वीटी आना पड़ता है। सितंबर 2016 से समाज कल्याण विभाग की पेंशन लोगों को नहीं मिली है।
इन लोगों ने नामिक में बनी उरेडा की 50 किलोवाट की बिजली परियोजना का मामला उठाते हुए कहा कि परियोजना से कभी-कभी ही बिजली मिलती है। परियोजना की नहर जगह-जगह टूटी है, मशीनों के नट टूटे हैं। उरेड़ा कभी मरम्मत नहीं करता। डीएम ने इन मामलों में कार्रवाई के निर्देश संबंधित विभागों को दिए हैं।