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कम लिंगानुपात के मामले में जिले का नाम शामिल होना चिंतनीय

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पिथौरागढ़। डीएम सी रविशंकर ने कम लिंगानुपात के मामले में देश में 8वें स्थान पर पिथौरागढ़ जिले का नाम शामिल होने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। कहा कि एक्शन प्लान बनाकर जिले में लिंगानुपात बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम करना होगा।
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प्रसव पूर्व निदान की जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में डीएम ने कहा कि देश के सबसे कम लिंगानुपात वाले 10 जिलों की सूची में पिथौरागढ़ का नाम अंकित होना किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि लिंगानुपात बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाने होंगे।

नुक्कड़ नाटकों, गोष्ठियों, कार्यशालाओं के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटी के महत्व की जानकारी देनी होगी। डीएम ने सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में ट्रेकिंग डिवाइस के माध्यम से नजर रखने, समय-समय पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण करने एवं जिला स्तर पर बेहतर काम करने वाली बेटियों और महिलाओं को आइकॉन बनाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बेटी बचाओ अभियान में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।
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डीएम ने कहा जिले में सबसे कम लिंगानुपात कनालीछीना, मूनाकोट और गंगोलीहाट विकासखंड में है। इन विकासखंडों में विशेष अभियान चलाया जाए। सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में भ्रूण हत्या की रोकथाम, कानूनी कार्रवाई समेत निर्धारित प्रावधानों की जानकारी देने के लिए डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल ने बताया कि वर्तमान में जिले का लिंगानुपात 914 है, जो पूर्व में 816 था।
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