पिथौरागढ़। प्रदेश सरकार इस जिले को जितना मिट्टी के तेल (केरोसिन) का कोटा आवंटित कर रही है, उतनी खपत नहीं है। इस कारण आवंटित कोटे में से मिट्टी का तेल वापस करना पड़ रहा है। शासन ने सिर्फ उन लोगों को ही मिट्टी का तेल बांटने का आदेश दिया है जिनके पास विद्युत और रसोईगैस का कनेक्शन नहीं है।
जिले में ऐसे राशनकार्ड धारकों की संख्या 31 हजार है। इन कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो लीटर मिट्टी के तेल प्रतिमाह दिया जाता है। इस कारण मात्र 62 किलोलीटर (62 हजार लीटर) मिट्टी के तेल की ही खपत हो पा रही है, जबकि प्रदेश सरकार ने जिले के लिए 167 किलोलीटर मिट्टी के तेल का कोटा निर्धारित किया है।
जिला पूर्ति कार्यालय के अनुसार जुलाई और अगस्त का मिट्टी के तेल का कोटा नहीं मिल पाया, जबकि दिसंबर में मिट्टी के तेल का कोटा मिल गया है। इस तेल को सिर्फ उन लोगों को ही दिया जा रहा है, जिनके पास बिजली और रसोईगैस का कनेक्शन नहीं है। जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार बर्मन ने बताया कि जिले के नाम पर आवंटित मिट्टी के तेल के कोटा में से 105 किलोलीटर को नहीं उठाया गया है।
क्योंकि मानक के अनुसार यह मिट्टी का तेल खपत नहीं हो पाएगा। जिले में अधिकतर लोगों के पास रसोईगैस और बिजली के कनेक्शन हैं। इस कारण वह मिट्टी का तेल लेने के अधिकारी नहीं हैं। अब शासन के सख्त निर्देश हैं कि मिट्टी का तेल हर व्यक्ति को न दिया जाए। उन्होंने बताया कि जिले में मिट्टी के तेल का कोई संकट नहीं है। मानक में आने वाले हर कार्डधारक को मिट्टी का तेल मिल रहा है।