पिथौरागढ़। सीमांत के लोगों का स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज करने के दावे कर खोला गया बेस अस्पताल उम्मीदों की कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहा है। संचालन के दो साल बाद भी अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है। अस्पताल में डायलिसिस के अलावा अन्य सुविधाओं का अभाव है। डायलिसिस यूनिट भी हंस फाउंडेशन के सहयोग से संचालित है। अस्पताल में न तो ओटी अस्तित्व में आ सकी है और ना ही लैब।
लिन्यूड़ा में 65 करोड़ से बने मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में दो साल बाद भी सिर्फ दो विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। इलाज के लिए जरूरी संसाधनों की कमी से मरीज भी यहां आने से कतराते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो साल में यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। ऑपरेशन करने के लिए न तो सर्जन हैं और ना ही ओटी।
यदि यहां पहुंचे मरीज को जांच की जरूरत पड़ी तो लैब न होने से उसे जिला अस्पताल जाना पड़ता है। सुविधा के नाम पर अस्पताल में सिर्फ डायलिसिस यूनिट स्थापित है और वह भी हंस फाउंडेशन के सहयोग से संचालित हो रही है।
मरीज कम होने से विशेषज्ञ जिला अस्पताल में अटैच
बेस अस्पताल के संचालन के दो साल बाद यहां सिर्फ हड्डी रोग और दंत रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो सकी है। अस्पताल में एक्स-रे, ऑपरेशन सहित अन्य कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में दोनों विशेषज्ञों के लिए बगैर संसाधनों के मरीजों का इलाज करना नामुमकिन है। अब तक सुविधाओं का विस्तार तो नहीं हो सका लेकिन दोनों विशेषज्ञों को जिला अस्पताल में अटैच कर जिम्मेदारी निभाई गई है।
पैथोलॉजिस्ट तैनात, लैब नहीं
बेस अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट की तैनाती करने में जल्दबाजी तो दिखाई गई है लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक यहां लैब अस्तित्व में नहीं आ सकी है। बगैर संसाधनों और लैब के पैथोलॉजिस्ट कैसे मरीजों की जांच करेंगे इसे पूरी तरह अनदेखा किया गया है। संवाद
कोट
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल संचालित है। जल्द ही मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होगा। इसके संचालन से पहले बेस अस्पताल में जरूरी सुविधाएं और संसाधन जुटाए जाएंगे। इस पर काम चल रहा है। जल्द ही बेस अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। - डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़