पिथौरागढ़। अपराजिता महिला हिंसा के विरुद्ध साझा आवाज के तहत अमर उजाला की ओर से गंगोत्री गर्ब्याल राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि महिला हिंसा तभी रुक सकती है, जब पुरुष अपनी सोच बदलें और समाज में अपने एकाधिकार को छोड़कर महिलाओं को भी अपने समान अधिकार दें। इस कार्यक्रम में विद्यालय की शिक्षिकाओं, डीएलएड प्रशिक्षुओं, एनसीसी कैडेटों सहित 200 लोगों ने महिला हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर संकल्प पत्र भरे और प्रतिज्ञा ली।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ। एनसीसी की लेफ्टिनेंट सरोज जोशी ने कहा कि यह अभियान महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़े शिक्षाविद् डॉ.पीतांबर अवस्थी ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को प्रतिज्ञा दिलाई।
उन्होंने कहा कि घर और बाहर दोनों स्थानों पर महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होती रही हैं। चुप्पी किसी भी मामले का समाधान नहीं है। इसलिए अब इस हिंसा के खिलाफ महिला और पुरुष दोनों को आवाज उठाने का समय आ गया है। इस दौरान शिक्षिका लता पाठक, हरेला क्लब के मनोज, निशा पुनेठा आदि मौजूद थे।
जागरूकता और कानूनी जानकारी जरूरी है। यदि कोई महिला जागरूक नहीं है तो वह उत्पीड़न का शिकार बन सकती हैं। अपने अधिकार, कानून की जानकारी रखना हर महिला के लिए जरूरी है। जागरूकता से ही महिलाएं हिंसा का शिकार होने से बच सकती हैं। -शहजादी गौसिया, प्रवक्ता
यदि किसी महिला का उत्पीड़न होता है तो उस महिला को खामोश रहने के बजाय आवाज उठानी चाहिए। चुप्पी नहीं साधनी चाहिए। पुरुष प्रधान समाज में आए दिन महिलाएं घर या बाहर उत्पीड़न का शिकार होती हैं। महिलाएं हिंसा का शिकार होने से तभी बच सकती हैं जब पुरुष महिलाओं को भी अपने समान अधिकार दें। -रेखा ढकरियाल, प्रवक्ता गणित
बालिकाओं को हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर जागरूक करना होगा। कई बार घर या बाहर उत्पीड़न होने के बावजूद महिलाएं या बालिकाएं आवाज नहीं उठा पाती है। समाज का भय, परिणाम का भय उन्हें आवाज उठाने से रोकता है। जागरूकता से ही महिलाओं का यह भय दूर होगा। -गीता बिष्ट, डीएलएड प्रशिक्षु
अपने अधिकारों के प्रति महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत है। हिंसा के खिलाफ आवाज उठाकर ही महिलाएं हिंसा से बच सकती हैं। कानून की जानकारी नहीं होने से कई महिलाएं हिंसा के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती हैं। महिलाएं जागरूक होंगी तो हिंसा जैसे अपराधों में कमी आएगी। -उषा भट्ट, डीएलएड प्रशिक्षु
महिलाओं को अपने अधिकार पता होने चाहिए। चुप रहना अपराधियों के हौसलों को बढ़ा सकता है। इसलिए यदि किसी महिला का उत्पीड़न हो रहा हो तो उचित माध्यम से हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। -सिमरन, एनसीसी कैडेट
पहले महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता था। इससे महिलाएं हिंसा का शिकार होती थीं। आज हिंसा के लिए जिम्मेदार व्यक्ति बच नहीं सकते हैं। छात्रा हो या कोई कामकाजी महिला सभी को हिंसा के खिलाफ शिकायत करनी चाहिए। मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से भी महिलाएं आवाज उठा सकती हैं। -अनीता, एनसीसी कैडेट