बैतड़ी (नेपाल)। नेपाल के बैतड़ी जिला मुख्यालय से बुधवार को दूरस्थ मतदान केंद्रों के लिए कर्मचारियों की टीम रवाना हो गई है। 26 नवंबर को होने वाले मतदान का चुनाव प्रचार 23 नवंबर की शाम पांच बजे बंद हो जाएगा। मतदाता प्रतिनिधि सभा (एमपी) और प्रदेश सभा (एमएलए) के लिए एक साथ वोट डालेंगे। बृहस्पतिवार की शाम छह बजे से भारत-नेपाल सीमा सील हो जाएगी।
भारतीय सीमा से लगे बैतड़ी जिले में चुनाव प्रचार अंतिम दौर में चल रहा है। प्रत्याशी देर रात तक गांव में जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम बृहस्पतिवार को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और पुष्प्प कमल दहल प्रचंड वाम गठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन में पुरचूड़ी के हाट मैदान में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। इसके लिए बैतड़ी प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।
मैदान के चारों ओर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 26 नवंबर को बैतड़ी, दार्चुला, बजांग और बाजुरा में होने वाले एमपी और एमएलए के चुनाव में इन जिलों में शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश दे दिए गए हैं। बैतड़ी में होने वाले चुनाव के लिए बुधवार को 182 मतदान केंद्रों के लिए 1400 कर्मचारियों और 2000 सुरक्षाकर्मियों को रवाना कर दिया गया है। नजदीकी मतदान केंद्रों के लिए कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी बृहस्पतिवार को रवाना होंगे।
बैतड़ी में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में वाम गठबंधन के एमपी के प्रत्याशी दामोदर भंडारी ने गोकुलेश्वर, सिरकोट और गाजरी गांवों में क्षेत्र के विकास के नाम पर वोट मांगे। लोकतांत्रिक गठबंधन के एमपी के प्रत्याशी नर बहादुर चंद ने भी बैतड़ी के कई गांवों में सभाएं की। बैतड़ी में एमपी के प्रत्याशी दामोदर भंडारी लगातार अपने स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। साथ ही एमएलए के लोकतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी हरिमोहन भंडारी और वाम गठबंधन के प्रेम प्रकाश भट्ट के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है। एमएलए सीट संख्या ख से लोकतांत्रिक गठबंधन के गणेश चंद और माओवादी पार्टी के लीलाधर भट्ट के बीच मुख्य मुकाबला है।
एक ही दिन चुनाव कराना अच्छा कदम
पिथौरागढ़। नेपाल में एक ही दिन एमपी और एमएलए के चुनावों से भारत के लोगों में भी खुशी है। भाकपा माले के प्रभारी गोविंद कफलिया का कहना है कि नेपाल जैसे छोटे देश ने एक ही दिन एमपी और एमएलए के चुनाव कराकर अच्छी मिसाल पेश की है। इस दिशा में भारत के चुनाव आयोेग को भी सोचना चाहिए। एक ही दिन चुनाव कराकर जनता पर खर्च का बोझ कम होगा। साथ ही जनता, सरकार और राजनेताओं की परेशानी भी कम होगी।