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लोगों की बगिया महकाने आ गए पूरनपुर के जितेंद्र और साथी

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पिथौरागढ़। पौधरोपण प्रकृति की रक्षा के लिए जरूरी है। इस सीजन सरकार के साथ ही पर्यावरण प्रेमी पौधरोपण करते हैं। रोजी-रोटी के लिए ही सही, पूरनपुर (पीलीभीत) के जितेंद्र कुमार और उनके साथी भी पर्यावरण संरक्षण के काम में जाने-अनजाने योगदान दे रहे हैं।
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अमूमन पहाड़ पर फूल और शोभादार पौधों की उपलब्धता नहीं हो पाती। मैदानी क्षेत्र से बरसात के सीजन में लोग पौधों की बिक्री के लिए यहां आते हैं। स्थानीय लोगों को इसका इंतजार भी रहता है। पूरनपुर के जितेंद्र और उनके साथी विभिन्न प्रजातियों के 3000 पौधे लेकर आए हैं। 10 जुलाई को पिथौरागढ़ पहुंचे जितेंद्र और उनके साथी अब तक करीब 800 पौधे बेच चुके हैं। ये लोग बरेली के इज्जतनगर से पौधे लाए हैं। बैंक सड़क के एक भवन के बरामदे में पौधों की बिक्री कर रहे हैं।

इनके पास बेला, चंपा, चमेली, रातरानी समेत फूलों की कई प्रजातियां हैं। उनके पास चायना पाम, बोनिस पाम, मोरपंख समेत कई शोभादार प्रजातियों के पौधे भी हैं। मनी प्लांट के साथ ही कई बेल वाले पौधे भी उपलब्ध हैं। फलों के शौकीन लोगों को लीची, अनार, आम, नीबू, अमरूद के पौधे भी मिल जा रहे हैं। ये लोग पौधे तो बेच ही रहे हैं। पौधों की परवरिश कैसे की जाए, इसकी जानकारी भी दे रहे हैं। इनके पास 80 रुपये से लेकर 350 रुपये तक मूल्य के पौधे उपलब्ध हैं। जितेंद्र और उनके साथी कहते हैं कि पौधों की बिक्री से उनको रोजगार तो मिलता ही है, धरती को हराभरा बनाने में अप्रत्यक्ष योगदान देने से सुकून भी मिलता है। यह लोग कई सालों से पिथौरागढ़ में पौधे बेचते आ रहे हैं।
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