फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी के अभाव में 60 हेक्टेयर जमीन बंजर

Sun, 05 Mar 2017 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
विज्ञापन
अमतड़ गांव में पानी के बिना सूखे खेत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हटवालगांव ग्राम पंचायत के अमतड़ गांव में 60 हेक्टेयर जमीन सिंचाई के अभाव में बंजर पड़ने लगी है। इस बार गांव के लोगों ने 10 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल बोई है, लेकिन शीतकालीन बारिश की मात्रा कम होने के कारण गेहूं के बीज जमीन से ऊपर नहीं आ पाए हैं। खेतों में 1996 तक नहर का पानी पहुंचता था, लेकिन नहर टूटने के बाद उसकी मरम्मत नहीं हो पाई। अब लोग बारिश के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। हाल के वर्षों में मौसम चक्र में आ रहे बदलाव का असर लोगों की खेतीबाड़ी पर पड़ रहा है।
विज्ञापन


गांव के लोगों ने बताया कि सिर्फ 600 मीटर की दूरी पर गोरघटिया नदी और 700 मीटर पर रामगंगा बहती है। यदि इन दोनों नदियों से लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण किया जाए तो किसानों के खेतों तक पानी पहुंच जाता। वह इस मांग को दस साल से उठा रहे हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं देते। अमतड़ गांव में गरीबों के 15 परिवार रहते हैं। उनकी आर्थिक हालत ऐसी भी नहीं है कि वह गांव छोड़कर अन्यत्र जा सकें।

इस बार किसानों को अपने खेतों को देखकर भारी मायूसी हो रही है। बड़े हिस्से में खेत बंजर पड़ गए। उनमें फसल तो दूर की बात है, घास तक नहीं उग पा रही है। गांव के लोगों ने बताया कि कृषि लोन लेकर बीज खरीदा गया। अब कर्ज चुकाने की समस्या आने वाली है। सरकार सिर्फ कर्ज माफी की घोषणा करती है, लेकिन व्यवहार में छोटे और गांव के किसानों तक उसका लाभ नहीं मिल पाता।
विज्ञापन


हर साल उठाना पड़ता है घाटा
अमतड़ गांव की कमला देवी का कहना है कि पहले खेतों से सालभर का राशन निकल जाता था। धीरे-धीरे जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। पानी न होने से हर साल भारी घाटा उठाना पड़ता है। वह कहती हैं कि गांव के किसानों को इस संकट से उबारने के लिए सिंचाई नहर का निर्माण करना चाहिए। तभी उत्पादन बढ़ पाएगा। 

कभी-कभी बीज का भी संकट
अमतड़ गांव की गंगा देवी कहती हैं कि कभी-कभी तो बीज का संकट भी खड़ा हो जाता है। सरकार बीज भी नहीं देती। बावजूद इसके गरीबों को बाजार से महंगा राशन खरीदकर खाना पड़ता है। सरकारी दुकानों में राशन नहीं मिलता। गांव के लोग गंभीर संकट में जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट से मुक्ति मिलनी चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें