धारचूला (पिथौरागढ़)। यारसा गंबू के विपणन के संबंध में उप प्रभागीय वनाधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया है कि अस्कोट अभयारण्य क्षेत्र में कीड़ाजड़ी का विदोहन प्रतिबंधित रहेगा। वन पंचायत, सिविल और अवर्गीकृत भूमि से वन पंचायत, ग्राम प्रधान और संबंधित पटवारी की अनुज्ञा पर यारसागबूं का विदोहन किया जा सकेगा।
बुधवार को धारचूला में हुई बैठक में उप प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि वन पंचायत, ग्राम प्रधान और संबंधित पटवारी की अनुज्ञा पर स्थानीय ग्रामीणों का पंजीकरण वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में किया जाएगा। कीड़ाजड़ी विदोहन का अधिकार केवल संबंधित ग्राम पंचायत के लोगों को होगा। दोहन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 200 रुपया वन पंचायत के खाते में जमा करना होगा। जड़ी खरीदने के लिए क्रेता का पंजीकरण प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में किया जाएगा।
रं कल्याण संस्था धारचूला इकाई अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल और जिप्ति के प्रधान देवी दत्त उपाध्याय कुछ शुल्क लगाकर कीड़ाजड़ी को भारत-नेपाल झूलापुल से नेपाल और भारत-चीन सीमा लिपुलेक से चीन ले जाने की अनुमति देने की मांग उठाई। कहा कि इससे सरकार को लाखों रुपये की आय होगी। बैठक में तहसीलदार विपिन चंद मुंदगली, वन क्षेत्राधिकारी अस्कोट आरएस बिष्ट, थानाध्यक्ष विजेंद्र शाह, कस्टम अधीक्षक अनिल मिश्र, वन दरोगा नरेंद्र राम, मोहन सिंह, भगत बिष्ट, आदि मौजूद थे।