बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। नवसृजित बेड़ीनाग नगर पंचायत के पहले चुनाव में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के रूप में धमाकेदार जीत दर्ज कर हेम पंत ने यहां की राजनीति का नया अध्याय शुरू किया है। सात दावेदारों में से अकेले हेम ने लगभग 51 प्रतिशत मत हासिल किए।
बेड़ीनाग में कांग्रेस के अग्रणी नेता रहे स्व. राधे पंत के पुत्र हेम पंत वर्ष 1998 में कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद वह कांग्रेस की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में डीडीहाट सीट से भाजपा के मजबूत प्रत्याशी बिशन सिंह चुफाल के खिलाफ कांग्रेस ने युवा हेम पंत पर दांव खेला।
चुनाव में हेम मात्र 2200 वोट के अंतर से चूक गए। अगले चुनाव में परिसीमन के बाद बेड़ीनाग के गंगोलीहाट सुरक्षित सीट में शामिल होने के कारण डीडीहाट से हेम की दावेदारी कमजोर पड़ गई। इसके बावजूद कांग्रेस संगठन में हेम को पीसीसी सदस्य, प्रदेश सचिव सहित महत्वपूर्ण दायित्व मिलते रहे। कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में हेम कई महत्वपूर्ण बोर्ड और निगमों के सदस्य भी थे।
विधायक समर्थकों से बढ़ी थी तल्खी
बेड़ीनाग। गंगोलीहाट के पूर्व विधायक नारायण राम आर्य के पिछले कार्यकाल में हेम पंत और उनके समर्थकों की विधायक से तल्खी काफी बढ़ गई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में हेम अपने समर्थकों के साथ निर्दलीय खजान गुड्डू के पक्ष में खुलकर आ गए थे। इस चुनाव में नारायण राम आर्य मामूली अंतर से हार गए थे। इस हार का कारण भितरघात माना गया था। इस बार नगर पंचायत चुनाव के लिए हेम ने भी टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन समझा जा रहा है कि पिछले चुनाव में पार्टी विरोधी भूमिका और पूर्व विधायक के दबाव के कारण पार्टी ने मजबूत दावेदारी के बावजूद हेम को टिकट की दौड़ से बाहर रखा। बावजूद इसके कई समीकरण हेम के पक्ष में थे। विधायक चुनाव में मामूली अंतर से हारने की सहानुभूति, जनता से निरंतर संवाद, समाजसेवा, इस चुनाव में राष्ट्रीय दलों के कमजोर प्रत्याशी आदि कारणों से हेम का समर्थन लगातार बढ़ता रहा। हेम की जीत से कांग्रेस संगठन और पूर्व विधायक नारायण राम आर्य एकदम से बैकफुट में आ गए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी को चौथे नंबर में संतोष करना पड़ा है। भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर में तो रहे, लेकिन उनका वोट प्रतिशत मात्र 16 रहा। यह परिणाम सत्ताधारी भाजपा विधायक मीना गंगोला के लिए भी करारा सबक लेकर आया है।