पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से एक से पांच अक्तूबर तक लगाए गए मर्म चिकित्सा शिविर में जिन लोगों को लाभ हुआ था, वह अब अपने अनुभव बताने लगे हैं। जीवन के प्रति निराशा में डूब चुके लोगों को यह शिविर आशा की किरण दे गया। कई लोग ऐसे हैं जो शिविर में आने के बाद स्वस्थ हो गए।
उनकी अपाहिज जिंदगी में नई रोशनी आ गई। लोग बार-बार यही कहते हैं कि ऐसा शिविर फिर से लगना चाहिए, ताकि वर्षों से बीमारी का बोझ लेकर चल रहे लोगों को भी स्वस्थ जिंदगी जीने का अवसर मिल सके।
पिथौरागढ़ में पांच दिन तक लगे इस शिविर में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने शिविर में जो अनुभव संजोए उनको अन्य लोगों को भी साझा किया। सबसे खास बात यह रही कि जिले के तमाम हिस्सों से लोग शिविर में पहुंचे थे।
सुन्न पड़े शरीर में होने लगी हरकत
डीडीहाट निवासी मनोज सिंह कफलिया ने बताया कि उनके शरीर के आधे हिस्से में लकवा पड़ गया था। शरीर सुन्न हो गया था। अमर उजाला फाउंडेशन के मर्म चिकित्सा शिविर में भाग लेने के बाद सुन्न पड़े शरीर ने हरकत शुरू कर दी है।
वह डॉक्टरों के बताए अनुसार मर्म बिंदुओं को दबाते रहते हैं। मनोज सिंह का कहना है कि शिविर ने जिंदगी के प्रति नई आशा का संचार किया। वह बताते हैं कि अब काफी हद तक स्वस्थ हैं। धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।
वर्षों पुराने माइग्रेन से मुक्ति मिली
धर्मशाला लाइन निवासी शीला खत्री को माइग्रेन और यूरिक एसिड की बीमारी थी। अमर उजाला फाउंडेशन के मर्म चिकित्सा शिविर में आने के बाद दोनों तकलीफें दूर हो गई। वह कहती हैं कि उससे पहले कई प्रकार की दवाएं खाईं, लेकिन फायदा नहीं हुआ।
मुफ्त मर्म चिकित्सा शिविर में जाने के बाद ऐसा लगा जैसे सब कुछ बदल गया है। अब सिरदर्द नहीं होता। यूरिक एसिड भी नियंत्रित होने लगा है। वह कहती हैं कि शिविर फिर से लगाया जाए।