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कांस्टेबल ने बेवजह फंसाने का आरोप लगाया

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल ने अपने ही विभाग के अधिकारियों पर मानसिक तनाव देने की शिकायत की है। साथ ही थाना प्रभारी पर आरोप लगाया है कि उसके सीधेपन के कारण बेवजह फंसाया गया। उसने पुलिस अधीक्षक के साथ ही पुलिस महानिरीक्षक को पत्र भेजा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कांस्टेबल ने मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखा है। इस मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने और दोषी पाए जाने पर अपने को पुलिस विभाग से बर्खास्त करने की भी बात कही है।
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वड्डा थाने में तैनात पुलिसकर्मी प्रदीप सिंह ने थाने के इंचार्ज पर उसकी ईमानदारी और सीधेपन के कारण बेवजह फंसाने का आरोप लगाया है। प्रदीप सिंह ने पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में कहा है कि 28 नवंबर को वड्डा के पोस्टआफिस में चोरी हुई थी। आरोप लगाया कि चोरी के कारण थाना इंचार्ज द्वारा सबसे सीधे लोगों को मोहरा बनाकर पुलिस अधीक्षक को गलत जानकारी दी और एसपी द्वारा दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया गया, जबकि दोनों की उस रात को गश्त की ड्यूटी ही नहीं थी। मामला यही नहीं थमा, 10 दिसंबर को एसपी द्वारा 3 दिन के अंदर अपनी बात रखने को कहा गया और फिर से गलत रिपोर्ट बनाते हुए दोनों का तीन दिन पूरे होने से पहले ही अल्मोड़ा स्थानांतरण कर दिया गया।

प्रदीप ने कहा कि उसके बच्चे पिथौरागढ़ में पढ़ते हैं। इस समय स्कूल छोड़ने से बच्चों को नए स्कूल में कहीं पर भी प्रवेश नहीं मिलेगा। उन्होंने इस आशय का पत्र डीआईजी नैनीताल और मानवाधिकार आयोग को भी भेजा है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक अजय जोशी का कहना है कि कांस्टेबल का निलंबन ड्यूटी में लापरवाही बरतने के कारण किया गया था। फिर भी उन्होंने यह कहा है कि कांस्टेबल द्वारा उठाए गए मुद्दों की नए सिरे से जांच की जाएगी।
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