धारचूला (पिथौरागढ़)। डीएम सी रविशंकर ने कहा कि मौसमी प्रवास पर आने वाले लोगों की दिक्कतों को देखते हुए नजंग से मालपा, बूंदी होते हुए गुंजी तक जाने वाले पैदल रास्ते को अब एक दिसंबर के बजाय तीन दिसंबर से बंद किया जाएगा। पैदल रास्ते पर तीन अप्रैल 2018 तक आवाजाही नहीं होगी।
चीन सीमा पर स्थित गुंजी और लिपुलेख तक दो वर्ष के भीतर मोटर सड़क का निर्माण हर हाल में पूरा किया जाना है। सड़क निर्माण के दौरान मलबा और पत्थर पैदल रास्ते पर गिरने का खतरा है। लोगों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क बनने पर सीमांत के लोगों और सुरक्षा बलों को आवागमन में सुविधा होगी।
तहसील सभागार में जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की बैठक में डीएम ने कहा कि तीन दिसंबर के बाद पैदल रास्ते से आवाजाही संभव नहीं हो पाएगी। मौसमी प्रवास पर आ रहे लोगों से कहा गया है कि वह तीन दिसंबर तक पैदल रास्ता पार कर लें। डीएम ने बताया कि इस समय गर्बाधार से आगे सड़क बनाने का काम चल रहा है। सड़क बनने पर लोगों को पैदल रास्ते की जरूरत नहीं होगी।
डीएम ने लोगों को आश्वस्त किया कि तीन दिसंबर तक सड़क निर्माण का काम नहीं होगा। इस दौरान पैदल रास्ते पर मलबा और पत्थर गिरने की कोई आशंका नहीं होगी। हालांकि लोगों ने डीएम से शिकायत की कि मौसमी प्रवास के दौरान भी सड़क का निर्माण कार्य जारी रखा गया। इससे कई स्थानों पर पैदल रास्ता बुरी तरह ध्वस्त हुआ है। जिलाधिकारी ने कहा कि एसडीएम राजकुमार पांडे पूरी स्थिति पर नजर रखेंगे और प्रगति रिपोर्ट देते रहेंगे।
बैठक में गर्ब्यांग के क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह, बूंदी की प्रधान लक्ष्मी रायपा, नाबी की प्रधान सनम देवी, कुटी की प्रधान सरिता देवी, भाजपा नेता हरीश गुंज्याल, देवकृष्ण फकलियाल, मोहन सिंह, महिराज सिंह सहित लोनिवि और एडीबी के अधिकारी उपस्थित थे।
इनरलाइन के मुद्दे पर अगले माह होगी चर्चा
डीएम सी रविशंकर ने कहा कि छियालेख से इनरलाइन को फिर से जौलजीबी लाने के मुद्दे पर दिसंबर प्रथम सप्ताह में तहसील दिवस में चर्चा होगी। तहसील दिवस में वह खुद मौजूद रहेंगे। धारचूला के लोग लंबे समय से इनरलाइन छियालेख से जौलजीबी लाने की मांग उठा रहे हैं। 1998 तक इनरलाइन जौलजीबी में थी। तब जौलजीबी से आगे धारचूला या अन्य स्थानों को जाने वाले बाहरी लोगों को एसडीएम से अनुमति पत्र लेना पड़ता था। इनरलाइन छियालेख शिफ्ट होने से धारचूला प्रवेश के लिए परमिट लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई। छियालेख धारचूला से 65 किलोमीटर दूर तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित है। डीएम ने कहा कि इनरलाइन को फिर से जौलजीबी लाने की स्थिति में उसके व्यावहारिक पक्ष का अध्ययन जरूरी होगा।