धारचूला (पिथौरागढ़)। पीएमजीएसवाई की लापरवाही का पता मजिस्ट्रीयल जांच पूरी होने पर ही लग पाएगा, लेकिन बृहस्पतिवार को हुए हादसे से यह साबित हो गया है कि सड़कों के निर्माण के समय मलबा हटाने के लिए मानकों का पालन नहीं किया जाता।
पीएमजीएसवाई जैसी निर्माण एजेंसी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह सड़कों के निर्माण में लापरवाही बरतेगी। पिथौरागढ़ से तवाघाट तक सड़क कटिंग के बाद पहाड़ी पर पत्थरों और मलबे को लटकती हालत में छोड़ दिया गया है। करीब 120 किलोमीटर लंबी यह सड़क पहले से ही खतरे का सबब बनी थी। पिथौरागढ़-तवाघाट एनएच के ठीक ऊपर पीएमजीएसवाई ने सड़क निर्माण का काम शुरू कर नए खतरे को जन्म दे दिया है।
पिछले महीने घटखोला नामक स्थान पर ही खेत गांव की एक महिला की गर्दन पहाड़ी से गिरा पत्थर लगने के कारण टूट गई थी। मानकों के अनुसार सड़क निर्माण के समय निकलने वाले मलबे का निस्तारण दूर किया जाना चाहिए, लेकिन इस जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। खोतिला गांव में भी सड़क निर्माण के दौरान निकले मलबे से पैदल रास्ता ध्वस्त हो गया है और लोगों को पैदल चलने में भी खतरा है। जिलाधिकारी सी रविशंकर का कहना है कि जांच के दौरान इन सभी तथ्यों की पड़ताल की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हुई है ऐसी घटना
धारचूला। पिथौरागढ़-धारचूला मार्ग पर वर्ष 2012 में एक जीप के ऊपर पहाड़ी से मलबा गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। बंदरलीमा के पास यह हादसा हुआ था। पिथौरागढ़ से धारचूला के बीच गुड़ौली, बंदरलीमा, लखनपुर में अब भी कई स्थानों पर सड़क के ऊपर मलबा और पत्थर लटके हैं। हल्की बारिश में ही यह सड़क पर गिर जाते हैं। इस कारण अक्सर यह सड़क बंद हो जाती है। सीमा सड़क संगठन इस सड़क के सुधारीकरण का काम कर रहा है।