स्नातक प्रथम सेमेस्टर में इस बार ऑनलाइन प्रवेश
पिथौरागढ़। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस बार अपने सभी कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश ऑनलाइन कराने का फैसला लिया है। 15 जून से विश्वविद्यालय की वेबसाइट खुल जाएगी और प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थी अपना प्रवेश आवेदनपत्र इस वेबसाइट पर भेज सकते हैं। प्रवेश के लिए नया नियम लागू होने से विषम भौगोलिक स्थिति वाले इस जिले के विद्यार्थियों को भारी दिक्कत आ सकती है। जिले में अधिकांश इलाके ऐसे हैं, जहां पर कोई नेटवर्क काम नहीं करता और इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. डीएस पांगती ने बताया कि पिछले दिनों नैनीताल में हुई प्राचार्यों की बैठक में यह तय किया जा चुका है कि इस बार बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विद्यार्थी अपना आवेदनपत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भेजेगा। उसमें वह जिस कॉलेज में प्रवेश लेना चाहता है उसका उल्लेख भी करेगा। विश्वविद्यालय से विद्यार्थियों की सारी सूची संबंधित कॉलेज को मिलेगी।
बाद में प्रवेश शुल्क जमा करने एवं अन्य जरूरी कागजातों को जमा करने के लिए विद्यार्थी को कॉलेज पहुंचना होगा। ऑनलाइन प्रवेश की अंतिम तिथि फिलहाल 15 जुलाई तय की गई है। उस अवधि में आवेदन न कर पाने वाले विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय कुछ समय और दे सकता है। इस बार कम से कम प्रवेश के लिए कॉलेजों में भीड़ नहीं दिखेगी। ज्यादातर विद्यार्थी नई व्यवस्था से खुश नहीं हैं।
संचार विहीन इलाकों में आएगी समस्या
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ कॉलेज की छात्रा ज्योति खोलिया का कहना है कि पिथौरागढ़ जिले के कई इलाके ऐसे हैं जहां पर संचार की सुविधा नहीं है। वहां से यदि कोई ऑनलाइन प्रवेश लेना चाहे तो उसे कठिनाई का सामना करना पड़ेगा और धन खर्च कर उसे शहर में आकर साइबर कैफे की मदद लेनी पड़ेगी।
ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थी होंगे परेशान
पिथौरागढ़। कॉलेज की छात्रा रुचि अवस्थी का कहना है कि इस तरह की नीतियां बड़े शहरों को ध्यान में रखकर नहीं बनानी चाहिए। जिले में कई कॉलेज ग्रामीण अंचलों में भी हैं और उनमें गांव के विद्यार्थी ही पढ़ने आते हैं। यदि कोई विद्यार्थी समय पर आवेदन जमा नहीं कर पाया तो दिक्कत में फंस जाएगा।
नियमों में ढील दी जानी चाहिए
पिथौरागढ़। कॉलेज की छात्रा भावना पाटनी का कहना है कि एक तरह से ऑनलाइन प्रवेश का नियम तो अच्छा है, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि इसका लाभ कितने विद्यार्थी ले पाएंगे। प्रवेश के नियमों में ढील दी जानी बेहद जरूरी है। वह कहती हैं कि शायद विश्वविद्यालय इस पर विचार करे।
विद्यार्थी परेशानी में नहीं पड़ने चाहिए
पिथौरागढ़। छात्रा पूजा चन्याल का कहना है कि अब जब सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है तो प्रवेश भी ऑनलाइन होना आश्चर्यजनक नहीं है, लेकिन विषम भौगोलिक स्थित वाले इलाकों का ध्यान दिया जाना चाहिए। यह ध्यान दिया जाए कि विद्यार्थी अनावश्यक परेशानी में न पड़े।
पुराना विकल्प अभी समाप्त न हो
पिथौरागढ़। छात्र करम सिंह ग्वाल नियम का स्वागत तो करते हैं, लेकिन धारचूला, नेपाल सीमा से सटे इलाकों, मुनस्यारी के संचार विहीन इलाकों के विद्यार्थियों के लिए पुरानी प्रणाली लागू करने के पक्ष में हैं। कहते हैं पुराना विकल्प अभी समाप्त नहीं करना चाहिए।