नेपाल के त्रिपुरासुंदरी मंदिर में मेले के दौरान डोला निकालते लोग
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नेपाल के पश्चिमांचल के बैतड़ी जिले के प्रसिद्ध त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दो दिनी आषाढ़ी मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है। मेले में 50 बकरों और दो भैंसों की बलि दी गई। मेले को देखने के लिए काफी संख्या में भारत और नेपाल के सीमावर्ती गांव को लोग आए थे। मेले में भारी मात्रा में प्रहरी बल तैनात थे।
सुबह नौ बजे माता की सवारी सजधज कर वाद्य यंत्र और ध्वज पताकाओं के साथ अपने मायके कापड़ीगांव के लिए निकली। सवारी के साथ देव कन्याएं चंवर हिलाते हुए और नर्तकियां नृत्य करते हुए गई। कुछ घंटों के बाद सवारी वापस मंदिर में आई। वहां माता का स्वर्ण आभूषणों के साथ शृृंगार किया गया। डोले को मंदिर में ले जाने के बाद वापस गर्भ गृह में रख दिया जाता है। उसके बाद बकरों और भैंसों की बलि दी गई। मेले के पहले दिन शनिवार को रात भर जागरण हुआ। भक्तों ने दीये हाथ में लेकर मनोकामना मांगी। मंदिर में मन्नत मांगने आए लोगों ने हवन-यज्ञ भी कराया। मेलेे क्षेत्र में भारी बारिश के चलते इस वर्ष भक्त कम आए थे।
बैतड़ी के डीएसपी नेत्रमणि गिरी, प्रहरी निरीक्षक कांतिराज जोशी, प्रहरी नायब निरीक्षक उमेश कुमार पाल, सामुदायिक प्रहरी सेवा केंद्र बैतड़ी अध्यक्ष दीपेश शाह मौजूद थे। मेले में किसान स्थानीय उत्पाद केले, आम, अमरूद लेकर आए थे। साथ ही भारत के कई व्यापारियों ने मिठाई और कास्मेटिक की दुकान लगाई थी। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर को विश्व की विशेष धरोहरों में शामिल किया गया है। मंदिर में पूजा करने वाले भक्त कई दिन पहले से मांस, मदिरा का सेवन नहीं करते। मेले को देखने के लिए 20 हजार से अधिक मौजूद थे।