पिथौरागढ़ के नैनीसैनी में शौचालयविहीन परिवार
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जिला मुख्यालय के निकटवर्ती गांव नैनीसैनी में आज भी 42 परिवार शौच के लिए जंगल की दौड़ लगाते हैं। कई बार प्रधान की ओर से इन परिवारों को शौचालय मुहैया कराने के लिए स्वजल समेत प्रशासन से अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे परिवारों के मुखिया का कहना है कि आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने से वह शौचालय नहीं बना पाए हैं।
करीब 800 की आबादी वाला नैनीसैनी गांव जिला मुख्यालय से महज आठ किमी की दूरी पर स्थित है। बावजूद इसके यहां लोगों के पास शौचालय तक नहीं है। गांव के रमेश राम, गोविंद राम, जीवन राम ने बताया कि शौचालय नहीं होने से उन्हें निकटवर्ती जंगल की दौड़ लगानी पड़ती है। रात में जंगली जानवरों का भी खतरा रहता है। महिलाओं और बच्चों को जंगल जाने में किसी अनहोनी की आशंका रहती है।
नैनीसैनी गांव हवाई पट्टी के लिए अब काफी प्रसिद्ध हो गया है। गांव में एक बाजार भी विकसित हो गया है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय की भी जरूरत महसूस होने लगी है। प्रधान महेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार स्वजल से शौचालय बनाने के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक ग्रामीणों को खुले में शौच से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कंपोस्ट पिट बनेंगे
पिथौरागढ़। स्वजल से मिली जानकारी के अनुसार नैनीसैनी गांव में केंद्र सरकार की ओर से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत पानी निकासी के लिए नालियां, सार्वजनिक कूड़ेदान, कंपोस्ट पिट आदि बनाए जा रहे हैं। इसमें पहले वर्ष सीमांत जिले के आठ गांव, उसके बाद नौ और इस वर्ष 222 गांवों का चयन किया गया है। इसमें 150 परिवार वाले गांव के लिए सात लाख, तीन सौ परिवारों तक 12 लाख और पांच सौ परिवारों तक 15 लाख रुपये देने का प्रावधान है। विभाग से कई गांवों को धनराशि अवमुक्त हो गई है, लेकिन कई प्रधानों द्वारा गांवों को गंदगी से निजात दिलाने के लिए अब तक ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। वहीं, नैनीसैनी के प्रधान महेंद्र सिंह ने बताया गांवों को गंदगी से मुक्त करने के लिए कंपोस्ट पिट बनाने का कार्य अब तक शुरू नहीं किया गया है।