पिथौरागढ़। थियेटर फॉर एजूकेशन इन मांस सोसायटी ने 30 दिनी लोक विधा और रंगमंच कार्यशाला के समापन पर स्थानीय प्रेक्षागृह में प्रख्यात लेखक एसआर हरनोट के नाटक कागभाखा (कौवे की भाषा) का मंचन किया। यह नाटक उन सभी माताओं को समर्पित था, जो जीवन में बहुत कुछ खोने के बाद भी अपने रीति-रिवाजों से जुड़ी हैं।
नाटक के माध्यम से दिखाया गया कि अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। दिखाया गया कि कौवे की भाषा वहीं समझ सकता है, जो प्रकृति से प्रेम करता हो। नाटक के माध्यम से रीति-रिवाज समाप्त होने, गांवों से हो रहे पलायन, युवाओं का रीति-रिवाज, परंपराओं से दूर होने पर प्रकाश डाला गया। साथ ही कुरीतियों पर कुठाराघात किया गया। बताया गया कि कौवे को कई बातों को पूर्वाभास हो जाता है। कागभाषा का ज्ञान रखने वाले लोगों को कौवे के संकेतों का पता चल जाता है।
नाटक में आमा की भूमिका को दीपा बिष्ट ने बखूबी निभाया। उनके अभिनय से शहर में रह रहे बेटे के विरह को बखूबी उभारा। अनीता बिटालू, शुभम कार्की, प्रीति रावत, मुकेश कुमार, दीपक, देव आशीष, तारा, मुकुल, अक्षय, विनोद, जितेंद्र, ज्योति, जिया, पीयूष, स्नेहा, सोम्या, अक्षिता, प्राची, दीपक ने अभिनय किया। मुख्य अतिथि जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी ने नाट्य मंचन की सराहना की। संस्था के निर्देशक योगेश पाठक ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।