पिथौरागढ़। बलुवाकोट गांव के लोगों की बैठक में जंगल को आग से बचाने का पूरा प्रयास करने का संकल्प लिया गया। गांव के सभी लोगों को आगाह किया गया कि वह जंगल की सूखी पत्तियों में आग लगाने का प्रयास न करें। वहीं, इस बार जंगलों में समय से पहले आग लगने की घटना से वन विभाग की चिंता बढ़ी है। वन विभाग अभी से जंगलों की आग को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है। लोगों को समय से पहले ही आग की घटनाओं से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। जंगलों की आग बृहस्पतिवार को पूरी तरह नियंत्रित हो गई।
नगतड़ के सरपंच रमेश ठगुन्ना की अध्यक्षता में हुई बैठक में परिवर्तन संगठन, कृषक क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया। कहा कि प्रतिकूल मौसम में जंगलों को बचाने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। गांव के सभी लोगों को आगाह किया गया कि वह जंगल की सूखी पत्तियों में आग लगाने का प्रयास न करें। इस समय नमी की मात्रा कम है और जंगलों में जल्दी से आग फैल जाती है। इस समय पतझड़ का मौसम भी रहता है। कई पेड़ों की सूखी पत्तियां जमीन पर गिर जाती हैं। बताया गया कि लोग पैदल रास्तों पर गिरी पत्तियों को हटाने के बजाए आग लगा देते हैं। बैठक में पुष्कर ठगुन्ना, रोहित खाती, कृषक क्लब के मदन ठगुन्ना, भूपाल चंद आदि शामिल थे।
इधर, वन क्षेत्राधिकारी दिनेश जोशी ने बताया कि इस बार 15 फरवरी से पहले ही लोगों को जंगलों की आग से बचाव के तरीके बताए जाएंगे। यदि इस बीच में बारिश हो जाती है तो आग की आशंका समाप्त हो जाती। वन विभाग इरादतन जंगलों में आग लगाने वालों पर कार्रवाई करेगा।
बता दें कि ठंड के इस मौसम में आमतौर पर जंगलों में आग नहीं लगती। वन विभाग 15 फरवरी से फायर सीजन घोषित करता है। फायर सीजन घोषित होते ही सबसे पहले जंगलों में जमा घास, फूस, पिरुल को जलाने के लिए नियंत्रित आग लगाई जाती है। इसके लिए बाकायदा एक लाइन खींची जाती है, ताकि अग्निकाल में जंगलों को नुकसान न पहुंचे।