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किसानों के लिए झूठी घोषणाएं न करे सरकार

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किसानों के लिए झूठी घोषणाएं न करे सरकार
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थल (पिथौरागढ़)। बेड़ीनाग में कर्ज में डूबे एक किसान की आत्महत्या के बाद किसान कुछ ज्यादा मुखर हैं। उनका कहना है कि पहाड़ के लिए कृषि नीति में बदलाव लाया जाना चाहिए और सरकार को चाहिए कि वह झूठी घोषणाएं न करे। सरकार की इसी नीति के कारण ही किसानों का भला नहीं हो पा रहा है। खासकर महिलाओं का कहना है कि हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी पहाड़ का किसान दो महीने के लिए राशन पैदा नहीं कर पा रहा है।

सरकारी राशन की दुकानों में राशन का कोटा कम कर दिया गया है। लोग महंगा राशन खरीदने को विवश हैं। बीपीएल और एपीएल के मानक अलग-अलग कर दिए गए हैं। किसानों को समय पर बीज, खाद नहीं मिलती। नहरों की हालत इतनी खराब है कि कुछ नहरें तो सिर्फ कागजों में चल रही हैं। जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। फसल पकने से पहले ही सुअर, बंदर, लंगूर उनको नष्ट कर देते हैं।
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कोई सरकार मडुवा, झंगोरा को बढ़ावा देने की बात करती है तो दूसरी सरकार के आने के बाद यह सारे मामले हाशिए पर चले जाते हैं। किसानों के प्रति सरकार की नीति से महिलाएं ज्यादा गुस्से में हैं।

सरकार की नीति बर्बाद करने वाली
जौरासी गांव निवासी भावना देवी का कहना है कि पहाड़ की कृषि के बारे में सरकार खुद ही अनिश्चय में है। देहरादून में वातानुकूलित कमरों में बैठकर नीति तैयार होती है। यदि खेतों में जाकर देखा जाए तभी सरकार की आंख खुलेगी। वह कहती हैं कि सरकार की नीति किसानों को बर्बाद करने वाली है। सरकार बताए कि राज्य बनने के बाद खेती का रकबा कितना बढ़ा।

मुआवजे की राशि बढ़ाए सरकार
पतेत निवासी जानकी देवी का कहना है कि आपदा आने के बाद नष्ट होने वाली फसल का मुआवजा इतना कम होता है कि उसे लेने में शर्म लगती है। सरकार कैसे यह आपदा राशि की घोषणा करती है, समझ में नहीं आता। मुआवजे की राशि को बढ़ाया जाए और यह कोशिश की जाए कि इससे कोई किसान वंचित न रहे पर ऐसा हो पाना संभव नहीं लगता।

पहले नहीं था जंगली जानवरों का आतंक
अमतड़ निवासी जीवंती देवी का कहना है कि पहले पहाड़ों पर जंगली जानवरों का आतंक नहीं था। हरिद्वार एवं अन्य जिलों से पकड़कर सारे बंदर पहाड़ के गांवों में छोड़ दिए गए हैं। अब बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग के पास कोई योजना नहीं है। यदि कहीं पर बंदर पकड़े भी तो उनको दूसरे गांव में जाकर छोड़ रहे हैं। यह तरीका बेहद गलत है।
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पहाड़ के हर किसान का कर्ज माफ हो
दड़मोली निवासी पुष्पा लोहनी का कहना है एक किसान की आत्महत्या के बाद भी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा है। अब तक किसान को सरकार की ओर से एक पैसे की मदद नहीं दी गई। सिर्फ बयानबाजी में इस गंभीर मुद्दे को उलझाया जा रहा है। सरकार पहाड़ के हर किसान का कर्ज माफ करे और उसकी सुविधाओं में और विस्तार करे। बयानबाजी बंद हो।
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