पिथौरागढ़। आपदा की दस्तक से सीमांत के लोग सहमे हैं। इसके बावजूद सीमांत की 40 हजार से अधिक की आबादी भगवान भरोसे है। जिले के कई गांवों में संचार सुविधा भी नहीं है। ऐसे में आपदा की स्थिति में ग्रामीणों को प्रशासन तक जानकारी पहुंचाने में ही काफी समय लग जाएगा। सीमांत के कई गांवों में सड़क भी नहीं पहुंच पाई है। कई सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हैं। ऐसे में आपदा की सूचना समय से प्रशासन तक पहुंचाना और वहां राहत पहुंचाना कठिन हो सकता है।
सीमांत जिले में हर साल बरसात आपदा काल बन जाती है। वर्ष 2013 से सीमांत जिले में 120 से अधिक लोग आपदा की भेंट चढ़े हैं। इन आपदाओं में 48 लोग लापता हुए जबकि 110 लोग घायल हो गए। आपदा में पिछले छह साल में 160 करोड़ से अधिक की निजी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। इस अवधि में 850 से अधिक परिवारों के मकान ध्वस्त हुए। इस सबके बावजूद प्रशासन ने हर साल हो रही आपदा की घटनाओं से सबक नहीं लिया है। जिले में भारत-चीन सीमा से सटे धारचूला मुनस्यारी तहसील के 24 गांव आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील हैं, लेकिन इन गांवों को विस्थापित नहीं किया गया है। इन गांवों में रह रहे 250 से अधिक परिवारों के लिए इस बार भी वर्षाकाल जीवन की परीक्षा साबित होगा। सरकार के हर साल के आश्वासनों ने इन्हें कोई राहत नहीं दी है।
दो कोट-
आपदा काल से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी की है। सभी तहसीलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किया गया है।
- आरडी पालीवाल, एडीएम, पिथौरागढ़।
आपदा काल को लेकर हर साल तैयारी होती है। आपदा में लोग अपनी जान गंवाते हैं। सरकार को आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए काम करना चाहिए।
- हरीश धामी, विधायक,धारचूला।