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डीडीहाट जिले को लेकर फिर शुरू होने लगी लामबंदी

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संजू पंत
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट जिला गठन की मांग को लेकर एक बार फिर लामबंदी शुरू होने लगी है। युवा वर्ग जिले के नाम पर ठगने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया में आक्रोश जता रहा है। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने लोक सभा से पहले जिला गठन नहीं होने पर किसी भी राजनीतिक दल को वोट देने के बजाय नोटा का बटन दबाने की चेतावनी दी है।

डीडीहाट जिले की मांग को लेकर पिछले डेढ़ दशक से क्षेत्रवासी लामबंद हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार के समय मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने स्वतंत्रता दिवस पर चार नए जिलों डीडीहाट सहित यमुनोत्री, कोटद्वार, रानीखेत के गठन की घोषणा की थी। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने नए जिलों के गठन का शासनादेश भी जारी कर दिया था। कांग्रेस के सत्ता में आने पर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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तब से डीडीहाट के लोग जिला गठन की मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पूर्व में घोषित चारों जनपदों के लोगों ने संयुक्त मोर्चा का गठन कर आंदोलन शुरू किया था। उस समय मिले आश्वासन पर संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन स्थगित कर दिया था। निकाय चुनावों में भी भाजपा नेताओं ने जिला गठन करने के दावे किए थे। अब लोक सभा चुनावों से पूर्व जिला गठन की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है।
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डीडीहाट में सोशल मीडिया में युवा जिले के नाम पर ठगने का आरोप लगा रहे हैं।
डीडीहाट जिला बनाओ संघर्ष समिति के संरक्षक डीएस पांगती का कहना है कि वर्ष 2011 से लेकर अब तक डीडीहाट जिला गठन के नाम पर केवल राजनीति की गई है। भाजपा की सरकार से लोगों की उम्मीदें बंधी हैं। सरकार को शीघ्र पूर्व में घोषित जिलों में कामकाज शुरू करना चाहिए। संयुक्त मोर्चा के सदस्य लवि कफलिया का कहना है कि चुनाव से पहले यदि जिला घोषित नहीं किया जाता है तो किसी भी किसी भी राजनीतिक दल को वोट देने के बजाय नोटा का बटन दबाया जाएगा। संयुक्त मोर्चा के महासचिव लोकेश भड़ का कहना है कि पूर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री को शिष्टमंडल ने ज्ञापन सौंपा था। इस पर चारों जिलों का एक्जामिन करने की बात कही थी। उनको इस वादे की याद दिलाई जाएगी।
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